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विजयानंद विजय संसद भवन में स्थित गाँधीजी की मूर्त्ति के सामने उनके तीनों बंदर अपनी चिर – परिचित मुद्रा में बैठे थे। वे बार – बार अपना सिर जमीन से टिकाते और सिर हिलाते। उनके अजीब व्यवहार से देखते – ही – देखते  वहाँ नेताओं की भीड़ जमा हो गई। […]

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वाकई ! इस चमत्कार को नमस्कार है !!   तारकेश कुमार ओझा  यह लेख स्वतंत्र लेखन श्रेणी का लेख है। इस लेख में प्रयुक्त सामग्री, जैसे कि तथ्य, आँकड़े, विचार, चित्र आदि का, संपूर्ण उत्तरदायित्व इस लेख के लेखक/लेखकों का है, मातृभाषा.कॉम का नहीं। क्या आप इस बात की कल्पना कर सकते […]