व्राह्मण कुल गौरव भगवान परशुराम जी के, जन्म दिवसोत्सव पर बार -बार वन्दना। शिव के महान भक्त विजया कमानधारी, सती रेणुका के पूत बार-बार वन्दना।। ऋषि जमदग्नि जी के अंशज महान वीर, कर में कुल्हाड़ी जिनके बार – बार वन्दना।। गाय गुरु रक्षा हित क्षत्रिय कुल द्रोही, भगवान परशुराम जी […]

कभी हमारी मोहब्बत की कहानी पढ़े ये जमाना, जिसमें पाक मोहब्बत का हो खजाना। आओ दें इस दुनिया को प्रेम का, अनोखा नजराना, कुछ ऐसा हो तेरा-मेरा इश्क सूफियाना। जिसे पाकर दुनिया की रुह पावन हो जाए, हमारे प्रेम की पावन कहानी लिखे ये जमाना। ये दुनिया राधा-कृष्ण के प्रेम […]

अमित अमीत अधूत आज क्यों, मनमानी पर उतराए हैं ? समीकरण क्यों बदल रहे हैं, समदर्शी क्यों घबराए हैं ? अब कैसी है यह दुरभिसंधि, दुरुत्साहन यह कैसा है ? दुराग्रही के आगे नत क्यों, सुसंचालन यह कैसा है ? सैनिक हैं वसुधा के लथपथ, आहत माँ संत्रस्त हुई है। […]

मेरी नींद को दिक्कत न भजन से है, न अजान से है, मेरी नींद को दिक्कत पिटते जवान और मरते किसान से है। मेरी नींद को दिक्कत न मंदिर से है, न मस्जिद से है, मेरी नींद को दिक्कत तंबू में बैठे मेरे भगवान से है। मेरी नींद को दिक्कत […]

हम पड़ोसी को भाई समझते रहे, दोस्ती से मसायल सुलझते रहे। नक्सली बेहयाई की हद कर दिए, चोरी-चुपके से हमसे उलझते रहे।। सोते सिंहों को छेड़ा बुरी बात है, तेरे पुरखों ने खाई सदा मात है। प्राण निर्दोष के लेके धोखा किया, हम बताएंगे तेरी क्या औकात है?? शत्रु को […]

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खुद को भूला हूँ तुमको पाने में, हर्ज़ क्या दिल से दिल मिलाने में। मेरे दिल की कली महक उठी, तुम जो आए गरीबखाने में । मेरे महबूब लौटकर आजा, बिन तेरे कुछ नहीं जमाने में। कट रहीं बिन तुम्हारे ये घड़ियाँ तेरी यादों के आशियाने में। है सितम क्या […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।