इश्क़ को कुछ दिनों में, बांधना गुनाह है। इश्क व्यापार नहीं, बस दिली चाह है। पश्चिमी सभ्यता में, दिन हैं बँधे हुए। रिश्ते उलझनों में, दिल है खुले हुए। रिश्तों की मर्यादा, यहाँ खुद से है वादा। यहाँ तो प्यार भी, मीरा-सा बेपरवाह है।       #शशांक दुबे लेखक […]

वक़्त की नदी से कुछ बून्द चुरा लूँ, पर वक़्त की नदी तो रुकने का नाम ही नहीं लेती। क्या वो ज़िन्दगी के सागर से ज्यादा तेज चलती है? फिर सोचा,तो पता लगा वक़्त की नदी ज़िन्दगी के सागर में ही मिलती है। फिर क्यों वक़्त की नदी, किसी एक […]

कैसे जीत मुझे मिल पाती संघर्षों की उहापोह में, भीतर तक अनमनी ललक को दुविधाओं ने घेर लिया था। अपनेपन का जाल बिछाकर, अपनों ने ही ऐसा फाँसा, सारे पंख उतिनवाकर भी, हँसता रहा आह बिन दिन-दिन। न तो फड़फड़ा पाया जी भर, और न बदल सका मैं करवट, ऐसा […]

कभी तरन्नुम-सी, कभी तब्बसुम-सी.. कभी हल्की-सी, कभी बहकी-सी तुम्हारी यादें। आज बहुत थामकर बैठी हूँ इनको,पर कभी बज उठती हैं, कभी चमक उठती हैं.. कभी सिहर जाती हैं, कभी बिखर जाती हैं। कभी धूप-सी, कभी घटा-सी.. कभी पुष्प-सी, कभी लता-सी.. तुम्हारी यादें। आज बहुत बांधकर बैठी हूँ इनको, पर… कभी […]

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देश प्रेम की भावना का, अलख हमें जगाना होगा। लाज तिरंगे की रखकर अब, अपना फ़र्ज़ निभाना होगा। ज़ात-पात का भेद मिटाकर, अब एक हो जाना होगा। बनाकर महाशक्ति देश को, दुनिया को दिखलाना होगा।     #वासीफ काजी परिचय : इंदौर में इकबाल कालोनी में निवासरत वासीफ पिता स्व.बदरुद्दीन […]

  प्यार कोई करता नहीं, आँख लड़ जाती है। किसी दीवाने से आँखों ही आँखों, में दिल की बात हो जाती है। अचानक आँखें मिलने से ये, क्या हो जाता है होश-हवास क्यों, खो जाता है। मन में मिलने की आस बढ़ जाती है, दिल को क्या हो जाता है। […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।