1

किसी जमाने में वे ‘अबे ओ बच्चा’ थे, फिर बच्चा बाबू कहलाए..सरकार में आ गए तो श्रीमंत बच्चा बाबू हो गए ‘स्मार्ट सिटी’ बनाने का हल्ला हुआ तो अब सर बी.बी. हैं। स्मार्ट सिटी बनाने की जिम्मेदारी सर बी.बी. पर भी है,सो होली के ठीक पन्द्रह दिन पहले उन्होंने प्रजा […]

आज व्यंग्यकार बनने के लिए मन अधीर हुआ,तो हो गया शुरु..,सोचा होली का माहौल है तो होली पर ही लिखा जाए। सोचना शुरू किया तो पहला प्रश्न आँखों के आगे आया कि, होली का मतलब है क्या?बचपन में नानी की जुबानी याद आई  कहानी कि,’हिरण्यकश्यप की बहिन हती होलिका बाके […]

2

हम एमबीए में एडमिशन लेने की ख़ुशी में झूम रहे थे, और हम कालेज कैम्पस में ही घूम रहे थे। लेकिन कालेज को लेकर हमारे मन में दुविधा थी, वहीं पूछताछ के लिए चौकीदार की सुविधा थी। चौकीदार से हमने पूछा,- भाई एमबीए करने के लिए कालेज कैसा है ? […]

दोनों वरिष्ठ कवि मंडी से टमाटर खरीद कर लौटे थे। एक जमाना था जब वे दो-चार कविताएं सुनाकर टमाटर-बैंगन वगैरह इकठ्ठा कर लिया करते थे। उस समय कविता को लेकर लोगों में जबरदस्त संवेदना थी। कविताएं तो उनकी आज भी वैसी ही हैं,टमाटर भी सस्ते हैं लेकिन लोगों ने बर्दाश्त […]

वे परसाईं जी के सबसे बड़े प्रेमी हैं, और परसाईं-प्रसाद बाँटने वाले इकलौते वितरक भी।जब भी वक्तव्य देते हैं,परसाईं से नीचे नहीं उतरते।आशय यह कि,परसाईं पूरी तरह उनके मुँह लग चुके हैं। इस बात को वे कई बार साबित भी कर चुके हैं। उनके पास परसाईं के हाथ की लिखी […]

एक पढ़ा-लिखा बेरोजगार युवक, नौकरी ढूंढते-ढूंढते हो गया था परेशान.. जाति में ब़ाहम्ण होने के अभिशाप से था हैरान। नेताओं के निजी स्वार्थ ने जनरल के कोटे को, इतना कम कर दिया कि नौकरी मिलना मुश्किल हो गया था, ब़्राह्मण होने का एक फायदा जरुर हुआ जन्मजात ग्यानी.. बुद्धि में […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।