ऐसा दीप कहाँ से लाऊँ।। तमस नाश करता है दीपक रोग शोक हरता है दीपक पीर हरे जो किसी दीन की ऐसा दीप कहाँ से लाऊँ।। दीपक जलता जगमग- जगमग चतुर्दिशा आलोकित लगभग जो मन में उजियारा कर दे ऐसा दीप कहाँ से लाऊँ।। ज्ञान रूप जलता है दीपक, शुभता […]

वे तमाशा दिखा रहे हैं तमाशबीन है देश दुनिया…………..। रोज नया तमाशा या नया-सा दिखाई देने वाला तमाशा, हर चीज तमाशे में बदलती जा रही है। हर आदमी हर आवाज हर कराह और चीख उनके कानों तक सुगम संगीत की तरह ही पहुंचती है। हर दृश्य, हत्या,बलात्कार,प्रदर्शन, प्रोसेशन, भूखमरी,आईपीएल,रेस, दंगा,हिंसा-आगजनी, […]

नन्हीं-सी प्यारी-सी, नादान होती है, बेटियां तो माँ बाप की पहचान होती है। न हो बेटी तो वंश न हो वीरान हो घर, घर में रौनक और उजाला लाती हर पहर। सिर को गर्व से ऊँचा करती है , बेटियां तो माँ बाप की पहचान होती है। एक रुन्द आहट […]

न समुन्दर की गहराई का कभी डर होना चाहिए, न आराम करने के लिए कभी घर होना चाहिए। यदि पाना है तुम्हें सूरज की ऊँचाईयों-सी सफलता, तो बाप की ऊँगली पकड़कर सफर होना चाहिए। ——-#सुरेन्द्र ठाकुर ‘अज्ञानी’                           […]

नहीं छोड़ पाया अपने खिलौने का मोह वो बालमन, छीना-झपटी करते रहे घण्टों एक-दूसरे के संग। नजर मेरी टकटकी लगाए देख रही थी उनके गुन, सहसा एक किनारे जा खड़ा हुआ वह शिशु खिलौने संग। माँ बुलाती रही बाबू आ जाओ, वह अनसुनी सी करता। मोह था उसे अपने खिलौने […]

में जानती हूँ मैं तुममें ही हूँ कहीं, हाँ मग़र, मुखर नहीं। अंतर में गहरे दबी रहती हैं ज्यों जड़ें और गहरे और गहरे अतल में.. चुपचाप पोसती हैं अंतिम छोर को फिर भी एकाकार होकर भी अभेद्य होकर भी मुखर नहीं..। ———-  #विजयलक्ष्मी जांगिड़ परिचय : विजयलक्ष्मी जांगिड़  जयपुर(राजस्थान)में […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।