काम किसी के आए इंसान उसे कहते हैं, दर्द पराया उठा सके इंसान उसे कहते हैं, दुनिया एक पहेली कहीं धोखा कहीं ठोकर, गिर के जो संभल जाए इंसान उसे कहते हैं। संसार मुसाफिर खाना है सांसों का आना-जाना है, सागर गहरा नाव पुरानी मौजों का आना जाना है, व्यर्थ […]

दीपक जलता है, रोशनी के लिए.. प्यार होता है, तड़पने के लिए। दीपक के संग, जलती है बाती.. प्यार के संग, चलती है पाती। तेल,दिया और बाती, आग की लौ से जलते हैं.. अधेरे को दूर कर रोशनी करते हैं। प्रकाश फैलाते, कभी-कभी हवा के.. झोके आ जाते हैं, रोशनी […]

मन में बसंत लिए,प्रेम की तरंग लिए, रोम-रोम देह का,श्रृंगार गीत गा रहा। हिय में छुपा हुआ था,बेसुध मन मयूर, नृत्य करने तीव्रता से,अब मचल रहा। कोयल भी गाने लगी,बाग़ महकाने लगी, आम भी वृक्ष में आने को है,ललचा रहा। उड़ रही अब धूल,खिल गए टेसू फूल, रंगों का त्यौहार,समीप […]

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मैंने खुदा को देखा है.. कभी रोटी बेलते हुए, कभी रोटी सेंकते हुए, कभी हल-बैल के साथ दौड़ते हुए। मैंने खुदा को देखा है, सिर पर थोड़ी-सी धूप लिए.. और माटी में अपनी खोई हुई, तक़दीर को खोजते हुए। मैंने खुदा को देखा है, कभी प्यासे होंठ लिए.. आँखों से […]

सौ अरमान देखे,तब जाकर एक अरमान मिला, उम्मीदों की कश्ती में बहकर वो फरमान मिला। अब क्या घबराना ऐसे इन आंधी और तुफानों से, मौत भी आ जाए तो पलटकर वो जंहान मिला। उम्मीदों का सफर फिर उन्हीं रास्तों पर ले चला, कयामत से गुजरकर तकदीर को, वो ईमान मिला। […]

यहां चेहरे पर भी चेहरे हैं, इंसानी राज बहुत गहरे हैं। दिल में आग लब पर गुलाब, लोग न जाने कहाँ आ ठहरे हैं। हाथ मिलाते हैं गर्मजोशी से, पर दिल में नफरत के बसेरे हैं। बोलते कुछ और करते हैं कुछ, लोगों के मिज़ाज़ यहां दोहरे हैं। इंसाफ के […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।