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होती सबको प्यारी बेटी, सबकी राजदुलारी बेटी.. गुड़िया को बहलाती बेटी, जीवन को महकाती बेटी। सपनों को चहकाती बेटी, रिश्तों को समझाती बेटी.. कलियों-सी खिल जाती बेटी, मुझसे जब मिल जाती बेटी। सपनों में मुस्काती बेटी, माँ को नाच नचाती बेटी.. पापा काँधे चढ़ती बेटी, उमर लांघकर बढ़ती बेटी। यौवन […]

ओ हक़ीक़तों की दुनिया, मुझको मेरा यार लौटा दे.. संग हवा के खेलता था जो, वैसा ही अखबार लौटा दे। जाने किन रंगों से तुमने, उसका वर्ण भिगो दिया है.. दिखलाकर कितने मोती, सपनों मे यूं डुबो दिया है। हमने भी तो खेली थी वो, बिन रंगों की एक होली.. […]

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मुझे नज़्म लिखनी कहाँ आती है, गीत,ग़ज़ल क्या होते हैं ये भी नहीं पता.. हाँ,ये पता है कि कुछ लिखता ज़रूर हूँ, पर क्या लिखता हूँ…पता नहीं ? ऐसा लगता है कि कभी-कभी अपने, ही फ़साने लिखता हूँ…. तो कभी करता हूँ चाँद की बातें, आसमाँ वाले की नहीं,ज़मी वाले […]

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कैसी कश्मकश कैसा ये प्यार है …. कभी मनुहार तो कभी तकरार है …… तुम न हो तो दुनिया वीरान मेरी …….. तुम हो,तो दिलों में बहार है।                                             […]

स्वर्ग सिधारे पिताजी, बेटा निभा रहा है फर्ज.. धीरे-धीरे उतार रहा है, पिता का लिया–कर्ज। कर्ज में वह पैदा हुआ, कर्ज में ही मर जाएगा.. कर्ज चुकाने के लिए, फिर कर्ज कर जाएगा। कर्ज एक ऐसा रोग है, जिसका न कोई इलाज.. घर-खेती सबकुछ बिके, बिक जाती है–लाज। बोल कर […]

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मैंने कब कहा तुझसे, तू सहारे लिख देना, गर ये तेरी मर्ज़ी है दर्द सारे लिख देना। तू हमारा मालिक है,तू हमारा खालिक है, हां अगर तू राज़ी है तो खसारे लिख देना। चाहे जितनी मुश्किल हो रास्ते में तुम लेकिन, कुछ निशान मंज़िल के, कुछ इशारे लिख देना। ज़िन्दगी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।