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सुनो….. क्या जानते हो तुम एक औरत की खूबसूरती क्या है! नहीं जानते तुम सुनो……. खूबसूरती औरत की हर कहीं दिखाई देती है, उसमें कभी देखा है माँ को अपनी दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत, उसका बोलना उसकी आंंखें बरसाती प्यार तुम पर बोलकर भी बिन बोले भी उसका दौड़ना […]

बेहद उदास असमर्थ-सी उन बेपरवाह उबड़-खाबड़ संकरे-चौड़े घुमावदार रास्तों से भागते-दौड़ते आगे ही आगे उन्नति के लिए सिर्फ अपने ही बिषय में सोचते उपेक्षित करते जाते उसमें भरते जाते जहरीली निशा निरर्थक और व्यर्थ समझ उसकी चमक सौंधी गंध खो रही है खो गई है वो मुस्कुराने की आस में […]

सबसे कह रही है वर्दियां। जुल्म सह रही है वर्दियां॥ आज सड़कों पर होता अपमान है। खाकी के साथ रोता संविधान है॥ आज कानून यहाँ मानता कौन है। कातिल छोड़ दो,मंत्री का फोन है॥ चल रही शीत लहर बह रही सर्दियां, सबसे कह रही है वर्दियां। जुल्म सह रही है […]

आसाराम-सिंधी है,राम रहीम-सिख जाट, रामपाल भी जाट,राधे माँ-खत्री सिख है तो जय गुरुदेव-अहीर हैं…यह सब गैर ब्राह्मण बाबा हैं। इन्हीं लोगों ने सनातन धर्म का सत्यानाश किया है। ब्राह्मणों का क्या महत्व है, अब सबको समझना चाहिए। परशुराम जी ब्राह्मण थे,शंकराचार्य जी भी ब्राह्मण थे और चाणक्य भी ब्राह्मण थे,जिन्होंने […]

खो गए विश्व गो-शाला, गो-मना हो के गोपाला; खोजते रहते ब्रज ग्वाला, कहाँ मिल पा रहे लाला। तके गोष्पद बिपद विहरन, रमण कर राधिका अनहद; चली मूँदे नयन चित-वन, कहाँ चितवन लखत त्रिभुवन। कभी मुरली सुने मधुवन, किए क़द छोटा वेलन तृण; खोज करती कभी मृदु सुर; साधना शोध में […]

हमारे मन में, जब तक वो ईश्वर,अल्लाह खुदा, राम रहेंगे। तब तक, ऐसे कई पाखण्डी रावण, अपने आप ही, इस धरा से, मिटते रहेंगे। अपने कृत्यों से, स्वयं सत्य की अग्नि में, जलते रहेंगे। सावधान रहना होगा, आज के रावण से, जन-जन के राम को। यह त्रेता नहीं, कलियुग है, […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।