सुन सजन, तुझसे कुछ कहना है। दूर बिन तेरे,  न एक पल रहना है। खुश हूं बहुत, तुझे पाकरll    जन्नत मिल गई,  जबसे तेरा प्यार मिला। जाने कितने जन्मों से, बिछड़ा मेरा यार मिलाll    होती होंगी ये ही, सपनों की दुनिया। जैसे मुझे तू, आज मिलाll    रहना […]

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सबकी माँ ऐसी होती है, देख परेशान बच्चों को खुद भी परेशान रहती है न खाएएं खाना हम,तो खुद भी अनशन कर देती हैl हमें खिलाने की खातिर,हमी से पंगे लेती है, डांटे हमको जोरों से,फिर खुद रो देती है…l क्या सबकी माँ ऐसी होती है ?   जब तक हम […]

बड़े-बुजुर्ग घर की रौनक है, एक रक्षा कवच,एक दौलत हैl अनुभव का हैं वे खजाना, बहुत खलता है उनका जानाl जीते-जी उन्हें अपना बना लो, सिर-आंखों पर उन्हें बिठा लोl खराब नक्षत्र भी सुधर जाएंगे, बिगड़े सब काम बन जाएंगेl बुजुर्गों की दुआओं का फल मिलता है, घर का कोना-कोना […]

नींद न आई रात भर दीए जलाए जाग कर, मन का कानन रहा भींगता सुधियों की बरसात में दीप सुलगता रहा दर्द में शलभों की पीड़ाएं सहकर, रजनी की आँखें पथराई अरमानों के आँसू पीकर। मेरी पीड़ा नील गगन के आंगन में भरती मैला है, धरती ने ममता से मेरे […]

बंदिशों का दौर गुजर जाए तो पास आओ न, बहुत दूर-दूर से हो गए हो,खास हो जाओ न। मेरे लबों की सोखियां खुश्क होने लगी है अब तो, इन लबों के दरमियां उन लबों को लाओ न। हैरान से दिन हैं मेरे परेशान-सी ये सर्द रातें हैं, कुछ गर्मजोशी का […]

अकेले-अकेले जा रहे हो, साथ हमें भी ले लो तो चलें। दिल में आपके तूफान है, बहुत कुछ बाँट लो तो चलें। रफ्ता-रफ्ता राह कट जाएगी, कुछ मेरी भी सुनो तो चलें। हाथ रीते हैं अभी तक आपके, हाथों में हाथ ले लो तो चलें। मौसम भी खुष्क है तपन […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।