मैं जितना रोकना चाहूँ वही हर बार होता है। करे मुझसे जो नफरत है उसी से प्यार होता है॥ समझ पाया नहीं अब तक खुदा तेरी खुदाई को, उसे इनकार होता है मुझे इकरार  होता  है॥ दुधारी इश्क़ खंजर है शिकारी खुद ही कट जाए, किया जो इश्क़ है तुमने […]

धवल कुर्तों की जेबों से, निकले अब तक आश्वासन है। झूठे वादों,झूठे स्वप्नों से, कब घर में,आता राशन है? जनता हुई बस द्रोपदी-सी, तैयार खड़ा दुशासन है। सेवा सुश्रुषा,सब बीती बातें, आँखों में बस सिंहासन है। कुंडली मार बस,बैठे इस पर, इनका यह प्यारा आसन है। गांधारी-सा पट्टी बाँधे, चलता […]

ग़ज़ल में शेर कह करके इशारा कर दिया जाए, कबाहत को गिराया जाए पारा कर दिया जाए। हमारी पीठ भी ख़ंजर की नीयत को समझती है, उसे हुशियार क़ातिल से दुबारा कर दिया जाए। #विवेक चौहान  परिचय : विवेक चौहान का जन्म १९९४ में बाजपुर का है। आपकी शिक्षा डिप्लोमा इन […]

मुट्ठी भर खुशियों की खातिर, छटपटाता इंसान अरमानों के आईनों में, बालू से घर बनाता इंसान। यह वह नहीं जानता। कि… उसका यह घर ढह जाएगा एक दिन, बिखर जाएंगे इसके हर कण हो जाएगा एक दिन चूर, ये खुशियां होती हैं थोड़ी इकट्ठा करता है जिन्हें वह चुन, ये […]

जीवन का संघर्ष कठिन है, खुद ही खुद से लड़ना पड़ता है और स्वयं कविता लिखकर के, स्वयं उसे पढ़ना पड़ता है। अंतर्द्वंद हमेशा चलता, सदा हृदय में अगर मगर है स्वयं चला पथ पर तो जाना, सरल नहीं है कठिन डगर है॥ बड़े-बड़े गड्ढे हैं पथ पर, कंटक भी […]

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आज फिर खाली हाथ ही लौटा हूं.. गले लगा पत्नी को मैंने धीरे से उसके कान में बोला … मुस्कुराकर वो पलटी और मन्दिर में दीप जलाने लगी … चाय लेकर के आई पास वो और बच्चों संग लाड़ लड़ाने लगी.. बडी़ उम्मीद से भरी थीं उसकी आँखें.. धैर्य धर […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।