पलभर की खुशियों से यहां क्यों मुस्कराना, पग-पग की कठिनाई को देख क्यों घबराना। बदलते रहते क्षण कहते हैं इसी को जिंदगी, चलें साहस से सदा मिले खुशियों का तराना। मंजिल दूर नहीं हौंसले ही कमजोर होते हैं, साहस से चलें,खुली राहें चहुं ओर होती हैं। देख कठिन राहों को […]

इतनी बड़ी हवेली में, इकली कैसे रहती मां। बड़े-बड़े संकट को भी, चुप कैसे सह लेती मां॥ कमर झुकी जर्जर काया, फिर भी चल फिर लेती मां। मुझको आता हुआ देख, सेंक  रोटियां  देती माँ॥ खाँसी आती है मां को, झट से मुँह ढक लेती मां। मेरी नींद न खुल […]

मातृभूमि से बढ़कर,कोई चंदन नहीं होता, नवकार से बढ़कर,कोई वंदन नहीं होता। सच्ची शिक्षा और प्रेरणा,अनूठी मिसाल है, त्याग तप और धर्म की,एक प्रतिमूरत है। यूं तो संत जमाने में,हजारों-लाखों होते हैं, पर उनमें भी कुछ आशाराम व राम-रहीम होते हैं। जिनके कर्मों से समाज,व धर्म कलंकित होता है, ऐसे […]

राष्ट्रभाषा की बयार बहती सजीवता से, मानस विशुद्ध हिन्दी गीत लिख दीजिए। संस्कृति संस्कार खान हिन्दी देश की पहचान, विश्व को सिखाई है वो रीत लिख दीजिए। प्राण में समाए हिन्दी राष्ट्रभक्ति भावना से, राष्ट्रभाषा हिन्दी हेतु गीत लिख दीजिए। बार-बार हिन्दी पर करे जो प्रहार,वैसे बैरी को परास्त कर […]

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सीने में अपने आग लिए आक्रोश जगाने आई हूं। एक दुष्ट पापी की मैं करतूत बताने आई हूं॥ ये अपनी सत्ता चलवाने नोटों पे नोट बिछाते हैं। आपस में सबको लड़वाने मजहब का नाम उठाते हैं॥ पैसों पे छूट जाते नेता, गरीबों के लिए बस फांसी है। वकील करे तो […]

मैं जा रही हूँ पापा, आपके ऊपर कर्ज का भार तिलक और दहेज का भार, खेती और महाजन का भार माँ के ईलाज का भार, इस हाल में मैं क्या करूं? मैं लड़की हूँ, बेबस और लाचार हूँ बिन पंख पक्षी के समान, मैं जा रही हूँ पापाl सड़क पर […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।