rahul prasad

सुनो परिधि  सी हो तुम!

जहाँ से शुरू था वहीं अटका हु तबसे!

तेरी यादों को…आज

विसर्जित कर दिया है,

गंगा के प्रवाह में,

कल कल करतीं लहरें,

मानों… ये पूछ रही ,

कहाँ गये वो दिन..

मीठी बातें हंसी मुलाकातें

वो सुनहरी भोर,वो उजली सुबह,जब

हम किश्तियों में बैठकर……

गाते थे प्रणय के गीत,

चाँदनी रातों में…आँखों से बाते

बाँहों में बाहें डाले,

सुध बुध खोये,गिनते रहे तारे..

सुबह शाम सोचें..तुमको क्यों ना इतना चाहें?

तेरा जबाब – हौंसला दो तो कुछ कहना चाहें

क्यों ना इनको रोज़ की आदत बना लें!

और इस सपने को हमेशा के लिए हक़ीक़त बना लें!!

त आज भी ठहरे हुऐ हैं मुझमें,,,!!

मैं आगे बढूँ भी तो कैसे,,,!!

गंगा की इठलाती धाराओं में,

आज ,प्रवाहित कर दिया मैंने,

खुद को भी आत्मसात् कर लिया,

जीवन के इस रूप को,

जिसमें तुम नहीं,सिर्फ यादें हैं तेरी,

इसलिए..विसर्जित कर दिया…

तेरी यादों को …!!

परिचय :

 नाम – राहुल प्रसाद 

जन्म – 5 अक्टूबर 1990 

पता – नावाजयपुर, पलामू, झारखण्ड 

शिक्षा – परस्नातक

कार्य क्षेत्र – एसबीआई अधिकारी 

विधा – कविता , कहानी , मुक्तक , लेख , संस्मरण एव लघुकथा 

प्रकाशन – पत्रिका (sbi प्रयास ) एव अख़बार (प्रभातखबर, वर्तमान अंकुर एव अन्य

लेखन का उदेश्य – जन जन में  हिंदी की मूल भावना से परिचित कराना एव समसायिक मुद्दों पर पारदर्शिता से सत्यता के आधार पर पक्ष रखना 

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