sanjay
भारत देश हमारा वो एक मात्रा देश है जिसे अपनी भारतीय संस्कृति पर बहुत ही लाज है / भारतीय संस्कृति में सबसे अहम हमारे रिश्ते होते है/ जो इनको समझता है और जानता है वो सच्चा इंसान कहलाने का हक़दार है /आप अपने बेटा बेटियों को उच्च शिक्षा के साथ पारिवारिक संस्कार भी दी तभी हम और आप हर रिश्ते को समझ सकते है  /
इसी रिश्ते को में आज के इस युग में समझाने के लिए एक छोटे से परिवार की घटना आपको बताता हूँ, जिसके द्वारा आप इस रिश्ते की परिभाषा को समझ जायेंगे / शर्माजी की बेटी जिसकी की शादी हो चुकी है , उसको एकाएक अपना जन्म दिन अपने माता पिता और भाई के साथ मानने का मन हुआ और ये भावना उसने अपने माता पिता और भाई को बताया / तो पूरे परिवार ने अपनी सहमति दे दी और कहाँ की बेटी ये घर कल तुम्हारा था आज भी है / तुम जैसा चाहो कर सकती हो / जिस दिन शर्मा जी की बेटी को सुसराल से आना था, तो सुबह शर्माजी जोऱ से चिल्लाते हैं और उनका बेटा प्रिंस दौड़कर आता है, और पूछता है… क्या बात है पिताजी ?
तूझे पता नहीं है,आज तेरी बहन रश्मि आ रही है ?  वह इस बार हम सभी के साथ अपना जन्मदिन मनायेगी , तेरे को पता है न अब जल्दी से जा और अपनी बहन को लेके आ, हाँ और सुन तू अपनी नई गाड़ी लेकर जा जो तूने कल खरीदी है उसे अच्छा लगेगा / लेकिन मेरी गाड़ी आज सुबह ही मेरा दोस्त ले गया है और आपकी गाड़ी भी ड्राइवर राम ले गया कि गाड़ी की ब्रेक चेक करवानी है। ठीक है तो तू स्टेशन तो जा किसी की गाड़ी लेकर या किराया की गाड़ी करके, उसे बहुत खुशी मिलेगी की उसका भाई उसे लेने आया है / पिता जी वो क्या छोटी बच्ची है, जो आ नहीं सकेगी ? आ जायेगी आप चिंता क्यों करते हो कोई टैक्सी या आटो लेकर—–/
शर्मजी कहते है की तूझे शर्म नहीं आती ऐसा बोलते हुए ? घर मे गाड़ियाँ होते हुए भी घर की बेटी किसी टैक्सी या आटो से आयेगी?
यदि ज्यादा जरूरी है तो आप चले जाओ मुझे बहुत काम है, मैं नहीं जा सकता । शर्माजी कहते है की तूझे अपनी बहन की थोड़ी भी फिकर नहीं ? शादी हो गई तो क्या बहन पराया हो गई तेरी नजरो में क्या ? क्या उसे हम सबका प्यार पाने का हक नहीं ? एक बात सुन ले कान खोलकर की तेरा जितना अधिकार है, इस घर में, उतना ही तेरी बहन का भी है। कोई भी बेटी या बहन मायके छोड़ने के बाद पराया नहीं होती समझे नलायक ।
मगर मेरे लिए शादी होने के बाद से वह पराया हो चुकी है और इस घर पर सिर्फ मेरा अधिकार है। इतना ही कहना था की शर्माजी का अचानक हाथ उठ गया और दो चाटे बेटे के मुंह पर जड़ दिए / तभी माँ आ जाती है । बेटा अपनी मम्मी से कहता है की पिता जी ने बिना वजह के मुझे मार दिया ?
शर्माजी कुछ शरम तो किजीऐ ऐसे जवान बेटे पर हाँथ बिलकुल नहीं उठाते।तुमने सुना नहीं इसने क्या कहा, अपनी बहन को पराया कहता है ये वही बहन है जो इससे एक पल भी जुदा नहीं होती थी–हर पल इसका ख्याल रखती थी। पाकेट मनी से भी बचाकर इसके लिए कुछ न कुछ खरीद देती थी। बिदाई के वक्त भी हमसे ज्यादा अपने भाई से गले लगकर रोई थी। ये आज उसी बहन को पराया कहता है।
प्रिंस -(मुस्कुराकर)  बुआ का भी तो आज ही जन्मदिन है पापा…वह कई बार इस घर मे आई है मगर हर बार अॉटो से आई है..आपने कभी भी अपनी गाड़ी लेकर उन्हें लेने नहीं गये…माना वह आज वह तंगी मे है मगर कल वह भी बहुत अमीर थी । आपको मुझको इस घर को उन्होंने दिल खोलकर सहायता और सहयोग किया है। बुआ भी इसी घर से बिदा हुई थी फिर रश्मि दी और बुआ मे फर्क कैसा ? रश्मि मेरी बहन है तो बुआ भी तो आपकी बहन है? पापा… आप मेरे मार्गदर्शक हो आप मेरे हीरो हो मगर बस इसी बात से मैं हरपल अकेले में रोता हूँ, की तभी बाहर गाड़ी रूकने की आवाज आती है….तब तक पापा भी प्रिंस की बातों से पश्चाताप की आग मे जलकर रोने लगे और इधर प्रिंस भी। ..कि रश्मि दौड़कर पापा मम्मी से गले मिलती है..लेकिन उनकी हालत देखकर पूछती है कि क्या हुआ पापा? तब शर्माजी बोलते है की तेरा भाई आज मेरा भी पापा बन गया है ।
रश्मि – ए पागल…/ नई गाड़ी न बहुत ही अच्छी है मैंने ड्राइवर को पीछे बिठाकर खुद चलाके आई हूँ और कलर भी मेरी पसंद का है।
प्रिंस – happy birthday to you दी…वह गाड़ी आपकी है और हमारे तरफ से आपको birthday gift..! बहन सुनते ही खुशी से उछल पड़ती है / और फिर एक दम से तभी बुआ भी अंदर आती है /क्या भैया आप भी न फोन न कोई खबर,अचानक सीधे गाड़ी भेज दी /  में एक दम से भागकर आई हूँ पता नहीं क्या हुआ ? फिर सब लोगो की खुशी को देखकर बोली की ऐसा लगा कि पापा आज भी जिंदा हैं ../ इधर पिताजी अपनी पलकों मे आँसू लिये प्रिंस की ओर देखते हैं और शर्मिंदी महसूस करते है /और प्रिंस पापा को चुप रहने का इशारा करता है। इधर बुआ कहती जाती है कि मैं कितनी भाग्यशाली हूँ , कि मुझे बाप जैसा भैया मिला, ईश्वर करे मुझे हर जन्म मे आप ही भैया मिले…/ पापा मम्मी को पता चल गया था कि ये सब प्रिंस की करतूत है / मगर आज फिर एक बार रिश्तों को मजबूती से जुड़ते देखकर वह अंदर से खुशी से टूटकर रोने लगे। उन्हें अब पूरा यकीन था कि…मेरे जाने के बाद भी मेरा प्रिंस रिश्तों को सदा हिफाजत से रखेगा~
बेटी और बहन ये दो बेहद अनमोल शब्द हैं /
जिनकी उम्र बहुत कम होती है । क्योंकि शादी के बाद बेटी और बहन किसी की पत्नी तो किसी की भाभी और किसी की बहू बनकर रह जाती है।
शायद लड़कियाँ इसी लिए मायके आती होंगी कि…उन्हें फिर से बेटी और बहन शब्द सुनने को बहुत मन करता होगा /
साथियो ये सब संस्कारो का ही किस्सा है जो सिर्फ और सिर्फ हमारे भारत में ही पाए जाते है / रिश्तो की डोर को हमें और आपको कभी भी पैसे से नहीं तोलना चाहिए ये बहुत ही अनमोल है  /

 #संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

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