rishabh radhe
छिपाकर घाव सीने में ,सदा सावन बुलाया है
लिखे जो गीत रोकर है उन्हें हँसकर सुनाया है
मुबारक हो तुम्हें दुनियाँ उजालो की मेरी साथी
मगर तुम ये नही पूछो मैंने क्या क्या जलाया है
लिखें जो जागकर हमनें तुम्हारे वास्ते कुछ खत
तुम्हें ख़ुशियाँ दिलाने को उन्हें रो रो जलाया है
कभी पूछा किसी ने ये ऋषभ आँखो में क्यो आंशू
तुम्हारा नाम न लेकर आँख कचड़ा बताया है
फटा यादों का है ज्वाला हमारे दिल मे जो साथी
बहाकर आंख से सागर उसे हमने सुलाया है
तुम्हारा नाम सुनकर के बग़ावत की मेरे दिल ने
तभी नगमा मोहबत का मैने महफ़िल में गाया है
हुई जब भी अमावस है हमारी ज़िंदगी मे तो
तुम्हारे वास्ते हमने सनम दिल को जलाया है
कभी जब इस पर हथेली पर तुम्हारा नाम डाला तो
न जाने सोचकर के क्या उसे हमने मिटाया है
सुकूँ चेने गवाकर के तुम्हें यादों में ला लाक़र के
तुम्हारा गम सनम हमने मुश्किल से भुलाया है
                         #ऋषभ तोमर ‘राधे’ 

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