durganand

भ्रष्टाचार बहुत दिनों से सुनता रहा हूँ
भ्रष्टाचार को पहले चाचा के मुंह से सुना
तो गली – कूची में ढूंढने लगा
सोचा कोई महान विभूति होगें वे
भारी – भरकम स्थूलकाय इंसान होंगे
लेकिन उसका कोई पता नहीं चला
जब पहली बार गांव से शहर आया
तो हर किसी से सुना भ्रष्टाचार बहुत है
देश इससे त्रस्त है
अन्ना आंदोलन से मैं जाना भ्रष्टाचार क्या है?
जिसमें केजरीवाल खांसते कह रहे थे
भ्रष्टाचार मिटाना है नया देश बनाना है
फिर सोचा होगा कोई उच्च पद को सुशोभित करते वाले बाबू
आफिस में गया वहां भी वह कुंडली मारकर बैठा था
बैंक में गया तो देखा बड़े टेबल पर
ए. सी के नीचे छह – छह कर रहा है
विश्वविद्यालय में गया तो देखा
वह अपने स्वर्णीम दौर में जी रहा है
उसके सामने सभी के दम फूल रहा है
उसके सामने सबके – सब बेदम है
कॉलेज में गया तो महसूस किया
कर्मचारी इसके बिना मुंह नहीं खोलते
जैसे भ्रष्टाचार कोई ‘मास्टर की’हो

विद्यालय में गया तो देखा
वह एम डी एम के खिचड़ी में खदक रहा है
फिर देखा विद्यालय में
वह साइकिल पर चढ़कर पोशाक लेकर भाग रहा है
समाचार में पढा
माल्या, मोदी(नीरव), मोदी (ललित) के तिकड़ी
भ्रष्टाचार नामक फ्लाइट से भाग गया
भ्रष्टाचार तो सड़ी-गली व्यवस्था की
कोख में पलकर
दैत्याकार रुप में सर्वत्र घूम रहा है
जैसे कोई छूटा सांढ हो
भ्रष्टाचार कोई नाम नहीं है
यह कुत्सित मानसिकता की उपज है
उसका न कोई रंग है न रूप है न आकार है
वह कोयला में काला हो जाता है
स्पेक्ट्रम में फोर जी के समान तेज
वह कहता है मैं हर जगह हूँ
मैं लीक इंडिया में हूँ
मैं टीम इंडिया में भी हूँ
और तो और मैं न्यू इंडिया में हूँ
कभी मैं बोफोर्स के रूप में आता हूँ
तो कभी फाल्कन के रूप में
कभी एयर इंडिया में आता हूँ
तो कभी ताबूत में शहीद होकर

                                    #दुर्गा नन्द यादव 

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