rikhabchand
कुछ तुम चलो,कुछ हम चलें।
जीवन की डगर पर साथ चले।।
लक्ष्य को पाना है एक दिन।
निशदिन समय के साथ चलें ।।
सुख दु:ख के हम सब साथी।
अपनत्व प्यार बाँटते चलें।।
अटल विश्वास हमारा मन में।
मंज़िल की ओर हम बढ़ चलें।।
हिम्मत,परिश्रम और लगन से।
अनेक बाधाओं के पार चलें।।
मोह माया के इस भँवर जाल से।
भक्ति की नैया से भव तर चलें।।
नफरत की अजब इस दुनिया में।
सद्भाव के नए तराने गाते चलें।।
प्रत्येक राहगीर के मन मंदिर में
दिव्य ज्ञान के दीप जलाते चलें।।
पथ में मिल जाए गर दीन-दुखी।
‘रिखब’सबको गले लगाते चलें।।
कुछ तुम चलो,कुछ हम चलें।
जीवन की डगर पर साथ चलें।।

          #रिखबचन्द राँका

परिचय: रिखबचन्द राँका का निवास जयपुर में हरी नगर स्थित न्यू सांगानेर मार्ग पर हैl आप लेखन में कल्पेश` उपनाम लगाते हैंl आपकी जन्मतिथि-१९ सितम्बर १९६९ तथा जन्म स्थान-अजमेर(राजस्थान) हैl एम.ए.(संस्कृत) और बी.एड.(हिन्दी,संस्कृत) तक शिक्षित श्री रांका पेशे से निजी स्कूल (जयपुर) में अध्यापक हैंl आपकी कुछ कविताओं का प्रकाशन हुआ हैl धार्मिक गीत व स्काउट गाइड गीत लेखन भी करते हैंl आपके लेखन का उद्देश्य-रुचि और हिन्दी को बढ़ावा देना हैl  

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