niraj tyagi
समय के बदलाव के बहाव में बहुत सारे बदलती वस्तुओं के साथ जीवन से जुड़ा एक अहम हिस्सा भी बहुत बदल गया।बात उन दिनों की शायद 1986 की जब छटी कक्षा में पढ़ाई की परेशानियों के

बीच भी एक चीज बहुत आराम देती थी।जी हाँ वो एक कोने पर रखा बड़ा सा रेडियो,जिसकी सुबह सुबह की वो पहली धुन शायद आज भी कहीं कानो मैं गुंझती है।घर में भाई बहनों में सबसे छोटे होने के कारण ज्यादातर सबकी पसंद की चीजें सुनना पढ़ता था।लेकिन आज भी याद है संध्या समय का वो सिबाका संगीतमाला जिसे सुनने के लिए सबकी सोच एक हो जाती थीं।मैं ये नही कहता कि आज भाई बहनों में वो प्यार नही है।लेकिन सायं समय वो एक ही प्रोग्राम का घर के सभी सदस्यों का इंतेजार करना अब कही खो सा गया है।सभी बच्चो ने आज घर के अंदर अपने अपने कोने बनाये हुए है जहाँ पर मोबाइल मैं व्यस्त बच्चे आज कहीं वो छोटी छोटी साथ रहने की खुशियाँ खोते जा रहे है।माँ बाप के अचानक सामने आते ही मोबाइल पर कुछ करते करते सकपका जाना एक आम घटना हो गयी है।मैं नही जानता ये हमारे बच्चो के लिए सही है या गलत।इसका फैसला शायद वक्त पर छोड़ना होगा।
 #नीरज त्यागी 
परिचय : 
नाम – नीरज त्यागी 
पिता का नाम – श्री आनंद कुमार त्यागी
माता का नाम – स्व.श्रीमती राज बाला त्यागी
निवास स्थान – लाल क्वार्टर लोहिया नगर 
ग़ाज़ियाबाद (उ. प्र)

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