sanjay
तुम्हे दिल लगी भूल जानी पड़ेगी /
गुरु चरणों में सीस झुका के तो देखो /
तुम्हे दिल लगी भूल जाने पड़ेगी /
प्रभु चरणों में सीस झुका के तो देखो /
तुम्हे दिल लगी भूल जानी पड़ेगी /
णमोकार मंत्र को जपके तो देखो /
तुम्हारे पाप कर्म धूल जायेंगे सारे /
ये सब अपने जीवन में उतार के तो देखो /
तुम्हे दिल लगी भूल जानी पड़ेगी //
निश दिन मंदिर में पूजा करो तुम /
तुम्हे शांति दिल में महसूस होगी /
तुम्हे दिल लगी भूल जाने पड़ेगी /
देव दर्शन निश दिन करके तो देखो /
तुम्हे दिल लगी भूल जानी पड़ेगी /१/
दया और धर्म तुम करके तो देखो /
ये माया सभी यही रह जाएगी सारी /
तेरे अच्छे कर्म ही तेरे संग जायेगे /
बाकि सभी यही पड़ा रह जायेगा सारा /
तुम्हे दिल लगी भूल जानी पड़ेगी /
दान धर्म तुम करके तो देखो /२/
गुरु और प्रभु जी शरण में तो जाओ /
संतो की वाणी जा सुनकर तो देखो /
तुम्हे धर्म चेतना का आनंद यही पर मिलेगा /
गुरु और प्रभु की सेवा कर के देखो /
तुम्हे दिल लगी भूल जानी पड़ेगी /३/
प्रभु चरणों में सीस झुका के तो देखो

               #संजय जैन

परिचय : संजय जैन वर्तमान में मुम्बई में कार्यरत हैं पर रहने वाले बीना (मध्यप्रदेश) के ही हैं। करीब 24 वर्ष से बम्बई में पब्लिक लिमिटेड कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत श्री जैन शौक से लेखन में सक्रिय हैं और इनकी रचनाएं बहुत सारे अखबारों-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहती हैं।ये अपनी लेखनी का जौहर कई मंचों  पर भी दिखा चुके हैं। इसी प्रतिभा से  कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा इन्हें  सम्मानित किया जा चुका है। मुम्बई के नवभारत टाईम्स में ब्लॉग भी लिखते हैं। मास्टर ऑफ़ कॉमर्स की  शैक्षणिक योग्यता रखने वाले संजय जैन कॊ लेख,कविताएं और गीत आदि लिखने का बहुत शौक है,जबकि लिखने-पढ़ने के ज़रिए सामाजिक गतिविधियों में भी हमेशा सक्रिय रहते हैं।

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