लहराए तिरंगा

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kartikey
लहर-लहर लहराए तिरंगा
आसमान तक जाए तिरंगा,
भारत के गौरव की गाथा
जन-जन तक पहुंचाए तिरंगा।
लहर-लहर लहराये तिरंगा…॥
मीठी वाणी बोल के हम-सब
जग में प्रेम बढ़ाएंगे,
सच के पथ पर जाएंगें हम
देश का मान बढ़ाएंगे हम।
लहर-लहर लहराए तिरंगा…॥
छोटे और बडे़ का सारा
भेद मिटा कर जाएंगे,
समता के सुख से तर होकर
गीत मिलन के गाएंगे।
लहर- लहर लहराए तिरंगा…॥
नेकी और बदी का सारा
खेल धरा पर होगा प्यारा,
छोड़ अहम की अपनी गठरी
मन से पाप मिटाएंगे।
लहर-लहर लहराए तिरंगा…॥
सु-कर्मों से पहचान बनाकर
स्वर्ग धरा पर लाएंगे,
जन से जन को गले लगाकर
‘राम’ राज्य ले आएंगे।
लहर-लहर लहराए तिरंगा…॥

            #कार्तिकेय त्रिपाठी ‘राम’

परिचय : कार्तिकेय त्रिपाठी इंदौर(म.प्र.) में गांधीनगर में बसे हुए हैं।१९६५ में जन्मे कार्तिकेय जी कई वर्षों से पत्र-पत्रिकाओं में काव्य लेखन,खेल लेख,व्यंग्य सहित लघुकथा लिखते रहे हैं। रचनाओं के प्रकाशन सहित कविताओं का आकाशवाणी पर प्रसारण भी हुआ है। आपकी संप्रति शास.विद्यालय में शिक्षक पद पर है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।