अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार के लिए डॉ. अर्पण जैन चयनित

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अखिल भारतीय 13 एवं प्रादेशिक 15 कृति पुरस्कार वर्ष 2020 के पुरस्कारों की घोषणा

 _सात वर्षों से संचालित मातृभाषा डॉट कॉम के लिए यह पुरस्कार मिला_ 

इन्दौर। साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद्, मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग, भोपाल द्वारा अखिल भारतीय 13 (तेरह) एवं प्रादेशिक 15 (पन्द्रह) कृति पुरस्कार कैलेण्डर वर्ष 2020 के पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। इस सूची में इन्दौर से संचालित मातृभाषा डॉट कॉम के लिए डॉ. अर्पण जैन अविचल को अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।

ज्ञात हो कि विगत सात वर्षों से हिन्दी के रचनाकारों का लेखन मातृभाषा डॉट कॉम पर प्रकाशित किया जा रहा है, जिससे लगभग तीन हज़ार से अधिक लेखक व 20 लाख से अधिक पाठक जुड़े हैं। अंतरताने के संपादकीय मण्डल में इन्दौर से शिखा जैन, दिल्ली से भावना शर्मा सहित आगरा से गणतंत्र ओजस्वी, इन्दौर से डॉ. नीना जोशी, नितेश गुप्ता जुड़े हैं।

साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने बताया कि ‘अखिल भारतीय प्रति पुरस्कार रुपये 1,00,000/- (रुपये एक लाख) एवं प्रादेशिक प्रति पुरस्कार रुपये 51,000/- (रुपये इक्यावन हज़ार) के साथ शाॅल, श्रीफल, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति के साथ रचनाकारों को अलंकृत किया जाता है।’

मातृभाषा डॉट कॉम को मिले पुरस्कार पर डॉ. वेदप्रताप वैदिक, राजकुमार कुम्भज, चित्रा मुद्गल सहित इन्दौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी, मुकेश तिवारी, लक्ष्मीकांत पण्डित, राहुल वावीकर, गौरव साक्षी, प्रेम मङ्गल, सपन जैन काकड़ीवाला, अमित मौलिक, नरेंद्र पाल जैन इत्यादि ने बधाई प्रेषित कर अभिवादन किया।

पुरस्कार के लिए जारी सूची में अखिल भारतीय पुरस्कार: 1. अखिल भारतीय पं. माखनलाल चतुर्वेदी (निबंध) श्री शिखर चंद जैन-हावड़ा की कृति ‘जिंदगी… न मिलेगी दोबारा’, 2. अखिल भारतीय गजानन माधव मुक्तिबोध (कहानी) डाॅ. दिनेश पाठक ‘शशि’-मथुरा की कृति ‘निरीह’, 3. अखिल भारतीय राजा वीरसिंह देव (उपन्यास) श्री आशुतोष राना-नरसिंहपुर की कृति ‘रामराज्य’, 4. अखिल भारतीय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल (आलोचना) डाॅ. शंभूसिंह ‘मनहर’-खरगोन की कृति ‘नयी कविता को रघुवीर सहाय का योगदान’, 5. अखिल भारतीय पं. भवानी प्रसाद मिश्र (गीत एवं हिन्दी गजल) डाॅ. वीरेन्द्र ‘निर्झर’-बुरहानपुर की कृति ‘संघर्षों की धूप’, 6. अखिल भारतीय अटल बिहारी वाजपेयी (कविता) सविता दास ‘सवि’-असम की कृति ‘किनारे पर आकर…’, 7. अखिल भारतीय कुवेरनाथ राय (ललित निबंध) डाॅ. विधि नागर-वाराणसी की कृति ‘संगीत नृत्य कथक’, 8. अखिल भारतीय विष्णु प्रभाकर (आत्मकथा-जीवनी) डाॅ. अंजनी कुमार झा-भोपाल की कृति ‘अटल बिहारी वाजपेयी’, 9.अखिल भारतीय निर्मल वर्मा (संस्मरण) श्री ललित कुमार-नोएडा की कृति ‘विटामिन जिन्दगी’, 10. अखिल भारतीय महादेवी वर्मा (रेखाचित्रा) श्री विजय मनोहर तिवारी-भोपाल की कृति ‘उफ़ ये मौलाना’, 11. अखिल भारतीय प्रो. विष्णुकांत शास्त्राी (यात्रा-वृत्तांत) श्री विमला भंडारी-सलूंबर की कृति ‘अध्यात्म का वह दिन’, 12. अखिल भारतीय भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (अनुवाद) डाॅ. दामोदर खड़से-पुणे की कृति ‘नौकरस्याही के रंग’, एवं 13. अखिल भारतीय नारद मुनि (फेसबुक/ब्लाग/नेट) डाॅ. अर्पण जैन ‘अविचल’-इंदौर का पेज ‘फ़ेसबुक/ब्लाॅग/नेट’ को दिया गया।

 प्रादेशिक पुरस्कार: 1. प्रादेशिक वृन्दावन लाल वर्मा (उपन्यास) डाॅ. जय बैरागी-झाबुआ की कृति ‘दण्डकारण्य’, 2. प्रादेशिक सुभद्रा कुमारी चैहान (कहानी) श्री संतोष मोहन्ती ‘दीप’-इंदौर की कृति ‘छांव की तलाश में…’, 3. प्रादेशिक श्रीकृष्ण सरल (कविता) श्री मुरलीधर चांदनीवाला-रतलाम की कृति ‘विरासत के फूल’, 4. प्रादेशिक आचार्य नंददुलारे वाजपेयी (आलोचना) डाॅ. राजेश श्रीवास्तव-भोपाल की कृति ‘राम अयन’, 5. प्रादेशिक हरिकृष्ण पे्रमी (नाटक)  श्रीमती साधना श्रीवास्तव-भोपाल की कृति ‘दादी की नज़र’, 6. प्रादेशिक राजेन्द्र अनुरागी (डायरी) श्री आलोक सेठी-खण्डवा की कृति ‘बचपन से पचपन’, 7. प्रादेशिक पं. बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’ (प्रदेश के लेखक की पहली कृति) श्री जगत शर्मा-दतिया की कृति ‘धनुष उठाओ हे अवधेश…’, 8. प्रादेशिक ईसुरी (लोकभाषा विषयक) श्री अखिलेश जोशी-बड़वाह की कृति ‘निमाड़ की वात छे छुहावणी’, 9. प्रादेशिक हरिकृष्ण देवसरे (बाल साहित्य) श्री महेश सक्सेना-भोपाल की कृति ‘जल ही कल है’, 10. प्रादेशिक नरेश मेहता (संवाद, पटकथा लेखन) श्री विशाल कलम्बकर-उज्जैन का पटकथा लेखन ‘क्रांति नायक’, 11. प्रादेशिक जैनेन्द्र कुमार ‘जैन’ (लघुकथा) श्री संतोष सुपेकर-उज्जैन की कृति ‘सातवें पन्ने की खबर’, 12. प्रादेशिक सेठ गोविन्द दास (एकांकी) डाॅ. नाथूराम राठौर की कृति ‘संकल्पों के पंख’, 13. प्रादेशिक शरद जोशी (व्यंग्य) श्री कुमार सुरेश-भोपाल की कृति ‘व्यंग्य राग’, 14. प्रादेशिक वीरेन्द्र मिश्र (गीत) श्री श्याम सुंदर तिवारी-खण्डवा की कृति ‘मैं किन सपनों की बात करूँ’ एवं 15. प्रादेशिक दुष्यंत कुमार (ग़ज़ल) श्री हेमराज नामदेव ‘राजसागरी’-जबलपुर की कृति ‘चलो अब घर खों चलिये’ को दिया गया है।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।