महान क्रांतिकारी

Read Time1Second

भारत मां को आजाद कराने,
निकला था एक अलबेला।
सिर पर बांध कफ़न केसरिया ,
पहना था भगत ने बसंती चोला।
भारत मां की आजादी ही,
था भगत की आंखों का सपना।
वार दिया मां की आजादी पर,
जिसने सारा जीवन अपना।
जलियांवाला बाग़ कांड ने,
भगत को ऐसा झिंझोड़ा था ।
अंग्रेजों को मार भागने खातिर,
घर बार भी अपना छोड़ा था।
चन्द्रशेखर ,सुखदेव, राजगुरु संग,
आजादी का बिगुल बजाया था,
लाजपतराय की मौत का बदला लेने को,
सांडर्स को मार गिराया था।
मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में,
केंद्रीय असेम्बली में बम फोड़ा था।
स्वतंत्रता सेनानियों संग मिलकर,
भारत में आजादी का राग छेड़ा था।
पीठ दिखा कर कभी भागे ,
थे आजादी के ऐसे मतवाले।
कर दिया फिर खुद को भगत ने,
अंग्रेजी हुकूमत के हवाले।
भगत सिंह,सुखदेव, राजगुरु को,
अदालत ने फांसी की सजा सुनाई।
मौत भी जिनको डरा सकी ना,
मां के शेरों ने भी दहाड़ लगाई।
अाई घड़ी जब फांसी चढ़ने की,
वीर सपूतों को जरा सिकन ना अाई।
तीनों क्रांतिकारियों ने मिलकर,
फिर ‘ इन्कलाब ‘ की बोली लगाई।
हंसते हंसते चढ़कर सूली,
वीरों ने अपना धर्म निभाया।
हर हिन्दुस्तानी को वीरों ने,
राष्ट्रधर्म का पाठ पढ़ाया।
तेईस वर्ष की उम्र में भगत ने,
अंग्रेजी हुकूमत को हिला दिया।
मैं भारत माता का बेटा हूं,
सारे जग को बतला दिया।
धन्य हो तुम भगत ,सुखदेव ,राजगुरु,
धन्य है तुम सबकी कुर्बानी,
जब याद करेगी दुनियां तुमको,
आएगा उनकी आंखों में पानी।

      जब तक सूरज में प्रकाश रहेगा,
      तेरा ' इन्कलाब जिंदाबाद ' रहेगा।

रचना –
सपना
जनपद – औरैया

1 0

matruadmin

Next Post

साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली की बिहार इकाई का भव्य उद्घाटन समारोह हुआ सम्पन्न

Tue Sep 29 , 2020
कार्यक्रम में देश के विविध प्रांतों, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, असम, हरियाणा, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, हिमाचल, उड़ीसा और अन्य कई राज्यों से करीब सौ साहित्यकारों ने भाग लिया राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी मिथलेश सिंह मिलिंद नई दिल्ली : साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली के तत्वावधान में संस्थान की […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।