कीर्ति प्रदीप वर्मा: शृंगार से ओज तक का तराना

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रश्मीरथी

कीर्ति वर्मा: शृंगार से ओज तक का तराना

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डॉ अर्पण जैनअविचल’

झीलों की नगरी के साथ-साथ साहित्यधरा भोपाल में पिता सत्यनारायण पैगवार व माता श्रीमती रुक्मणि पैगवार के घर जन्मी कीर्ति आज हिंदी कवि सम्मेलनों में शृंगार और ओज की कवितायेँ गा कर सरस्वती की साधना में रत है।  बी ए तक शिक्षा ग्रहण करने वाली कीर्ति जी का विवाह दादा माखन लाल चतुर्वेदी जी की जन्मधरा बाबई निवासी प्रदीप वर्मा जी से हुआ। वर्तमान में आप  भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा जिला होशंगाबाद में जिला मंत्री के दायित्व का निर्वहन कर रही है।  साथ ही आप अंतरा शब्दशक्ति वेब पत्रिका की संपादकीय सलाहकार, कसेरा समाचार में बतौर सदस्य संपादक मंडल के साथ मातृभाषा उन्नयन संस्थान में बतौर राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हिंदी की अहर्निश सेवा में सक्रीय है। साथ ही आप अखिल भारतीय साहित्य परिषद,प्रभात साहित्य परिषद,शिवसंकल्प साहित्य परिषद,ब्रांड एम्बेसेडर “स्वच्छता अभियान” बाबई व अध्यक्ष- ताम्रकार समाज महिला मंडल भी है।

आप प्रतिमा रक्षा समिति करनाल द्वारा वुमंस एम्पावर्ड अवार्ड 2017, व काव्य कोकिला सम्मान, साहित्य सम्मान,हिंदी सागर सम्मान 2017, श्रेष्ठ कवियत्री सम्मान 2017, शब्द सुगंध सम्मान 2017 ,साहित्य साधना सम्मान 2017, साहित्य सेवा सम्मान 2015 , काव्य श्री सम्मान,अंतरा शब्द शक्ति सम्मान 2018, भाषा सारथी सम्मान 2018 सृजनशील सम्मान,श्रेष्ठ शब्द शिल्पी सम्मान 2018, नारी सागर सम्मान, वुमन्स आवाज सम्मान 2018 आदि सम्मानों से सम्मानित हो चुकी है।

दूरदर्शन एवं आकाशवाणी से भी कविता वाचन करने वाली माँ सरस्वती की बेटी कीर्ति वर्मा काव्य मंचों पर हिंदी भाषा के सौंदर्य में अभिवृद्धि करने के साथ-साथ पुस्तक लेखन में भी सक्रीय है, उनकी पुस्तक सृजन समीक्षा , लौट आओ गौरैया और अपने सपने (लघुकथा संग्रह) भी आ चुकी है। इटारसी के तिरंगा मंच पर पहला कविसम्मेलन करने वाली कवयित्री कीर्ति वर्मा कविता के साथ-लघु कथा, आलेख लेखन आदि में भी सक्रीय है।

हिन्दी सेवा में अग्रणी और हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा संचालित जनसमर्थन अभियान में भी आपकी सक्रियता और हिंदी सेवा अतुलनीय है। यही कई कारण हिंदी कवि सम्मेलनों की ऊर्जा के रूप में कीर्ति वर्मा पहचानी जाती है।

IMG-20180903-WA0034कीर्ति प्रदीप वर्मा
रस- वीर रस और शृंगार
अनुभव – १० वर्ष से अधिक
निवास- बाबई, जिला होशंगाबाद (मध्यप्रदेश)

 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।