अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेष:

ईश्वर का अप्रतिम सृजन, लोग जिसे नारी, महिला, स्त्री, देवी, चपला, चंचला तमाम उपमानों से पुकारते हुए ईश् कृति का धन्यवाद ज्ञापीत करते है, जो समाज के रंगों के एकत्रीकरण का तार्किक कारण भी है |

कहा भी जाता है क़ि जिसको बना कर परमात्मा भी स्वयं के हाथों को निहारते नहीं थका, और यकायक उसने भी स्वयं को धन्यवाद देकर उसे देवी के रूप में स्वीकार्यता देते हुए धरती पर असल सृजन का अधिकार दिया है | यक़ीनन ईश्वर की इस अनमोल कृति में हर संबंध, रिश्ते, भावना, समाज, संघर्ष, सत्ता, और सर्वस्व है | सहज रूप से परमात्मा के अनूठे गौरव के स्वागत की परंपरागत हकदार केवल नारी ही है| जिसकी कल्पना मात्र से जीवन के अगणित अध्याय सिल-सिलेवार दृष्टिपटल पर नृत्य भैरवी का आव्हान करते हुए नाचनें लगते है, उस स्त्री का ज़रा-सा प्रकाश जड़ जीवन में चैतन्यता का बोध करा देता है, संसार की सामंजस्यता की अकेली यौद्धा, नमन-वंदन अभिनंदनीय है |

से माँ, मातृभूमि, महिला और मातृभाषा  भी जुड़ा है, वहीं भाषा जिसमे राष्ट्र के चैतन्य होने के प्रमाण है, माँ स्वरूप में जिसने जनमानस के वेग को ममत्व की छाह में पल्लवित किया, मातृभूमि से परिचय करवाते हुए एक भूमि के टुकड़े को मातृतुल्य स्थान देते हुए शिरोधार्य करवाया, जिसने महिला शब्द की ध्वनि मात्र को संसार की गर्जना में बदल दिया, इसीलिए जननी तुल्य परिवेश की भाषा को मातृभाषा के रूप में स्वीकार्यता मिली और इसी के प्रतिनाद से जगत की समस्त प्रजातियों को पहचान भी मिली |

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भाषासारथीयों का सैकड़ा

१०० कार्यदिवस के अथक प्रयासों ने रचनाकार दीर्घा की दीप्ति प्रज्वलित की साथ ही अंकरूपण का कार्य चेतन बेंडाले जी और उनके साथी अभियंताओं ( इंजीनियर ) के सार्थक समूह के समयानुकूल  योगदान ने मातृभाषा परिवार में रचनाकारों की सूची में सैकड़ा जड़ दिया | आज १०० भाषासारथीयों की रचनाओं को मातृभाषा. कॉम पर सहेजने का अवसर दिया , गर्वित है मातृभाषा परिवार जिसमें २३% स्थान उस परमात्मा की दैविक शक्ति से संचारित शक्तिपुंज का बना |

मातृभाषा हिन्दी के विस्तार की इस यात्रा में हमारे साथ :

  1. माला ठाकुर सोनगिरा जी,
  2. आभा चंद्रा जी
  3. आकाँक्षा सक्सेना जी,
  4. नीलू बग्घा जी,
  5. हरप्रीत कौर जी
  6. कल्पना भट्ट जी
  7. कीर्ति कापसे जी,
  8. ममता गिनोरिया जी,
  9. डा. मीनाक्षी स्वामी जी,
  10. लिली मित्रा जी,
  11. नादिया मसंद जी,
  12. नेहा लिम्बोदियया जी,
  13. निशा गुप्ता जी,
  14. साक्षी पेम्माराजू जी,
  15. संगीता शर्मा जी,
  16. डा सरला सिंह जी,
  17. श्वेता जोशी जी,
  18. डा सीमा रामपुरिया जी,
  19. शिल्पा सोलंकी जी,
  20. सुषमा दुबे जी,
  21. तृप्ति तौमर जी,
  22. उमा मेहता त्रिवेदी जी
  23. प्रियंका बाजपाई जी

भाषा सारथीयों का साथ मिला |

अर्जुन जैसे धनुर्विद यौद्धा को कृष्ण समान सारथी मिल जाने मात्र से युद्ध विजय का आधा आगाज़ हो जाता है, उसी तरह मातृभाषा हिन्दी को आप सभी रचनाकारों के रूप में भाषा सारथी मिलने से उसके विस्तार और विकास के युद्ध का शंखनाद माना जाएगा | हमारी मातृभाषा हिन्दी की लड़ाई अँग्रेज़ी से तो अपनी जगह है पर महत्वपूर्ण लड़ाई अपनों से भी है, जो अंग्रेजियत के आलोक में उसे विस्थापितों के समान व्यवहार का शिकार बना रहे है |

आइए हम सब मिल कर इंडिया से भारत की ओर चले, आइए हम भाषा के दिवाकर की रश्मीयों को समस्त मानव जाती को अर्पण करें, राष्ट्र की गौरवशाली सभ्यता और संस्कृति को विश्वपटल पर अमिट अंकित करें, आइए मिल कर भारत को पुन: विश्व गुरु  बनाएँ ….

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं सहित…

जय हिंद – जय हिन्दी

अर्पण जैनअविचल

सहसंस्थापकमातृभाषा. कॉम

 

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