Archives for व्यंग्य

फिर क्यों आई हो ?

बार-बार इनकार करने पर भी पीछा नहीं छोड़ती,तुम समय व स्थान का भी अनुमान नहीं लगाती,कब कौन-कहाँ-कैसी भी अवस्था में हो,तुम तपाक से आ जाती हो। लाख मना करने पर…
Continue Reading

ठलुआ और ठंड

देश में ठलुओं की कमी नहीं है। ठलुओं को ठंड सबसे ज्यादा लगती है। ठलुओं और ठंड का वही रिश्ता है,जो बाबूओं का लंच समय में ताश का। ठंड आते…
Continue Reading

साली-सत्ता

  साली देखने में अच्छी लगती है,उसकी बात करने में आनन्द आता है,कुछ को मजा भी आता है। साली के साथ विचरण की इच्छा में न जाने कितने जीजा भ्रष्टाचार…
Continue Reading

आओ प्रसिद्ध हुआ जाए

अनन्तकाल से ही मानव की इच्छा रही है कि वह प्रसिद्ध हो,उसके पास धन-दौलत हो,उसे मान-सम्मान प्राप्त हो,लोग उसे जाने पहचानें। तब से ही मानव इन सबको प्राप्त करने के…
Continue Reading

चातक-साहित्यकार

देश साहित्यकारों से अटा पड़ा है। हर गली-मुहल्ले, शहर सब स्थानों पर `शादी ही शादी` के बैनर जैसे साहित्यकार ही साहित्यकार के बैनर अटे पड़े हैं। मंच पर श्रोता और…
Continue Reading
12

मातृभाषा को पसंद कर शेयर कर सकते है