Archives for काव्यभाषा

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“एक कविता ऐसी भी”

एक कविता ऐसी लिखूँगी पढ़कर सारे रो देंगे। जीवन का कटु सत्य लिखूँगी अपना आपा खो देंगे। पिंजरे की बुलबुल तो उड़ गई मैं घर- तज कित जाऊँगी। साथी की…
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मेरा देश बदल रहा है………………….

मेरा देश बदल रहा है ! कहाँ थे हम कहाँ जा रहे है, बस अंधी दौड़ में भागे जा रहे हैं, तरक्की है कोई या फिर भेष  बदल रहा है, क्या…
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हिंदी

हर तरफ़ हिंदी का ही गुणगान है! देश की मेरे यही पहचान है!! ये बड़ी उत्तम गुणी जन मानते! लेखनी में फूंक देती जान है!! नेक दिल बन सब शरण…
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मेरी अपनी सोच

जिसे निभा न सकूँ,/ ऐसा वादा नही करता..! मैं बातें अपनी हद से, ज्यादा नहीं करता../१/ तमन्ना रखता हूं / आसमान छू लेने की../ लेकिन औरो को गिराने का /…
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योग

मन,वचन,कर्म से रहे देव समान तभी मिल पायेगा समाज मे मान आत्मा भी तब निर्मल हो जायेगी परमात्म कृपा सहज हो जायेगी जीवन मे सुख ही सुख हो जायेगा कष्टों…
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क्या है मेरा दोष

कर्म करू असफल कहलाऊ इसमें क्या है मेरा दोष मैं गरीब से जाना जाऊँ इससे भी न होता रोष। मैं चलते चलते थक जाऊँ इसमें क्या है मेरा दोष ।…
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