Archives for काव्यभाषा

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गहरा दर्द

हाथ-पैर में लगे जो काँटा, वो तो सबको दिखता है | पर जो"अंतस"में चुभा है, वो न किसी को दिखता है | रह -रहकर जो टीस है देता, दिल कितना…
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होली पर बाल कविता

छोटे-छोटे बच्चो ने होली पर बनाई है अपनी एक टोली। पानी से पिचकारी भर ली और रंगों से भर ली है झोली।। पानी से गुब्बारों को भरकर आज मनाएंगे सब…
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होली मरदानी

रंग सजे  सीमा  पर सारे। शंख  बजाए कष्ट निवारे। संकट आतंकी  बन  बैठे। कान  उन्हीं के वीर उमेंठे। राष्ट्र सनेही  भंग  चढ़ालो। शत्रु समूहों को मथ डालो। ओढ़ तिरंगा ले…
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रंग

रंग मौसम में भी अब घुलने लगे खेतो में सरसो के फूल खिलने लगे आदमी पर चढ़ा है फाल्गुन सुरूर रंग भरे गुब्बारे अब चलने लगे गुंजिया की महक भी…
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खतरे का घर

खतरे के निशान से ऊपर तुम आ चुकी वह नदी हो कठिन है बचना मेरा शायद बह जाऊंगा तेरे साथ उस किनारे ही मेरी जमीन थी छोटा था सपनों का…
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