‘शाख से पत्ता कोई जुदा नहीं होता। रोता है अब बचपन,बच्चा नहीं रोता।।’ किसी भी देश की संस्कृति,भाषा, साहित्य के सर्वांगीण विकास में शिक्षा का बहुमूल्य योगदान है। शिक्षा ही वो माध्यम है,जिसके अनुरूप अपने जीवन मूल्यों,संस्कृति व किसी देश की बहुमुखी प्रतिभा का आंकलन किया जा सकता है। भारत […]

हो जाएं कितने भी मालामाल तेरे बिन, रहेंगे कसम से जा़न कंगाल,तेरे बिन..। तिलिस्म-ए-इश्क है कि,तेरे चहरे की क़शिश, आता नहीं किसी का भी ख़याल तेरे बिन..। धड़कनों के धरने जारी हैं कूचा-ए-दिल में, नींदों ने भी कर दी है हड़ताल तेरे बिन..। जिस तरह बिना राधा के,आधा है कन्हैया, […]

‘जो हुआ उसमें भगवान की मर्ज़ी थी। हर व्यक्ति जो आया है,जाएगा,जितने दिन का साथ था सो साथ रहा।’ आंटी के मुख से ऐसे शब्दों को सुन मन प्रफुल्लित हो गया। अभी तीन साल पहले ही हम मिले थे। मैं उन्हें योगा सिखाती थी। 65 वर्षीय आंटी शांत और सक्रिय […]

(आज मातृ दिवस के अवसर पर विशेष ) किससे सुनूँ माँ,आज फिर वो लोरी, कैसा था चंदा मामा कैसी थी चकोरी। तेरी याद में माँ आज आंख भर आई, पिला दो मुझको माँ वो नेह की कटोरी।। वो धनिए की चटनी,चूल्हे की रोटी, कहती थी इससे स्वस्थ रहती किडनी। बड़े […]

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(आज मातृ दिवस के अवसर पर विशेष ) माँ का हृदय रत्नाकर-सा, माँ तारापथ समान है। माँ की जान बसे बच्चों में, माँ बच्चों की जान है।। माँ खुशियाँ संग मनाती है। माँ मिश्री-सी,लोरी सुनाती है।। माँ गलती पर बच्चों को डाँटती है। माँ अपना दुःख न बाँटती है।। माँ […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।