2018 मसाला फ़िल्म से साल का अंत,मरहम का काम करती फ़िल्म, सिम्बा

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इदरीस खत्री द्वारा
सिम्बा
निर्देशक :- रोहित शेट्टी
अदाकार :- रणवीर सिंह, सारा अली खान, सोनू सूद,वैदेही, आशुतोष राणा, अश्विनी कलसेकर, गणेश यादव, अशोक समर्थ, कैमियो अक्षय कुमार, अजय देवगन, गोलमाल टीम,
बजट :- 80 करोड़
स्क्रीन्स :- 4500 भारत
2015 में आई दक्षिण भारतीय फिल्म टेम्पर से प्रभावित-आधारित कहा जा सकता है, जूनियर एन टी आर मुख्य भूमिका में थे,,
फ़िल्म देखने के बाद लम्बे वक्त तक ज़हन में तरोताजा रहती है,
सिम्बा उसी पर आधारित फिल्म है रीमेक नही बोल सकते क्योंकि यह फ़िल्मकारों की रचनाधर्मिता कई बार कुछ अच्छे बदलाव लाती है इसीलिए इसे रीमेक नही बोल रहा
लेकिन रोहित मसाला परोसने में कुशल है गोलमाल-सिंघम
तो हम फ़िल्म की कहानी पर चर्चा नही करते अपितु फ़िल्म पर चर्चा आगे बढ़ाते है
दोस्तो 70 के दशक में मनमोहन देसाई मसाला फिल्मो के बड़े निर्देषक में आते है, डेविड धवन भी शोला और शबनम, आंखे,,
सिम्बा एक मेंढक पानी से बाहर आता है देखता है कि खरगोश बड़ा जानवर है जंगल का, लेकिन खरगोश को भेड़िया मार कर खा जाता है तो भेड़िया बड़ा हो गया, फिर भेड़िये को शेर मार देता है तो शेर बड़ा हो गया ,,
लेकिन शेर जब भेड़ियों से भिड़ जाए और जंगल को भेड़िया मुक्त करने का तय कर ले तो असली जंग शुरू होती है
बुरा बनना आसान है लेकिन बुराई में से अच्छाई का ज़ाग जाना कष्टदायक होता है साथ ही सद मार्ग पर चलना, बलि मांगता है तो कभी कभी खुद के आत्मसम्मान की बलि, कभी खुद की बुराइयों की बलि चढ़ानी पड़ती है,,
या खुद की भी
फ़िल्म में यही हुवा
एक अनाथ बच्चा संग्राम भालेराव उर्फ सिम्बा (रणवीर) बड़ा आदमी बनना चाहता है वह देखता है बस्ती का भाई बड़ा आदमी है लेकिन भाई को पोलिस के रहमोकरम पर ज़िंदा है तो वह तय करता है पोलिस वाला बनेगा, बनता है और भ्र्रष्ट पोलिस वाला बनता है और बड़े गुंडों की दलाली कर पैसा बटोरता है इसी दौरान उसकी मुलाकात शगुन(सारा) से होती है, दोनो को प्यार हो जाता है,
इसी बीच एक डॉक्टरी पड़ रही छात्रा आकृति (वैदेही)जो गरीब बच्चों को पडाती भी है, दोस्ती होती है उससे सिम्बा को पता चलता है कि शक्तिशाली व्यक्ति दूर्वा (सोनू सूद) अपने भाइयों (अमृत सिंह, सौरभ गोखले) ड्रग्स के कारोबार में लिप्त है, आकृति उनके क्लब पहुच कर मोबाइल में वीडियो बनाते हुवे पकड़ी जाती है,,
आगे की कहानी के लिए फ़िल्म देखना बनती है,,
पहला हाफ कॉमेडी से भरपूर है दूसरा हाफ संजीदा और भएनात्मक हो जाता है,
लेकिन बुराई से अच्छाई को अपनाना बेहद पीड़ादायक होता है,
फ़िल्म बलात्कार जैसे गम्भीर मुद्दे को उठाती है लेकिन जो हल दिखाया गया है वह अभ्म्भव प्रतीत होता हैं,,
रोहित ने सिंघम फ़िल्म का शानदार इस्तेमाल किया है,
फ़िल्म एक दमदार, गम्भीर सन्देश देने में कामयाब लगी,
एक्शन दृश्य लाजवाब बने है,
फिल्मांकन जोमन टी जान का अच्छा है
अदाकारी पर बात करे तो रणवीर में परत दर परत निखरते जा रहे है, स्टार होने के तमाम गुण मौजूद है, सारा में असीम सम्भावनाए है,, फ़िल्म के चरित्र अभिनेता आशुतोष राणा, वैदेही, अश्विनी, गणेश यादव, आशिक समर्थ लाजवाब लगे है
 वेसे भी खान बंधू के दिन लद गए है, ठग्स, रेस 3, ज़ीरो से लग रहा है,
गाने पुराने ही है उन्ही से काम चला लिया गया, न ही फ़िल्म में उनकी कोई तारतम्यता है न ही कहानी को आगे बढ़ाते है तो गांनो पर बात फ़िज़ूल है,,
कूल मिलाकर आप मनोरंजन करना चाहते है तो फ़िल्म देख कर निराश नही होंगे
फ़िल्म को 3.5 स्टार्स

#इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं| इनका परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।