सतयुग से कलयुग

Read Time0Seconds
aasha amit nashine
सतयुग से कलयुग है आया,क्यों दशा न बदली युग बीते ,
नारी  सदियों से  है  अबला , वेदों  के कथन  सभी  रीते।
देवी  तो मात्र  दिखावा है , झुकता जग नहीं ,झुकाता है ,
पल पल पर मौन परीक्षा दे,परिणाम दुखी कर जाता है ।
भावों  का  गहरा सागर ये , पर जीती  सदा अभावों  में,
भोग्या  समझा बस नारी को , हारा  नर ,रण में दाँवों में।
पांचाली  सीता  मीरा  को , छल बल से गया झुकाया है,
छोड़ा सम्मान स्वयं का फिर, नारी  ने  वचन निभाया है।
चंदा  सूरज  औ  धरती  नभ,सारे  देवों  को  जनम दिया,
कर  त्याग समर्पण और नेह , नारी ने घर को स्वर्ग किया।
उजली  छाया  पर  गंदे  पग , मैला  मन  नर का  होता है,
नन्हीं कलियों को मसल रहा ,नित  बीज घिनौने बोता है।
रहती क्यों  विवश जगत आगे ,क्यों दान  सुता  होती आई,
आघात  सहे बिन जन्म लिए , दुनिया करती क्यों निठुराई।
ऐ पुरुष!मेरा बस इक सवाल ,कब तक औरत अन्याय सहे,
कोई  तो  ऐसा  हल भी  दो ,  जग  नारी को अबला न कहे।
है  सहनशीलता धैर्य  बहुत , प्रतिबिम्ब  प्रेम का, पारस मन,
यह प्रेम  प्रदाता सदियों  से , है सदा समर्पित तन  मन धन।
तू  बन  मशाल अब  राख बना , जो  पावों को जकड़ें रस्में ,
चूड़ी के साथ पहन हिम्मत, पथ से न भटक,खा ले कसमें।
नारी  खुद  का  सम्मान  करे  , अरु  मौन  सुने अंतर्मन का,
गूँजा  स्वर  सभी दिशाओं  में ,श्लोक यही इस जीवन  का।
सक्षम   है  तू ,जीवन  दाता  ,रसना  को  डुबा  रौद्र  रस में,
दृढ़ निश्चय कर रखना हिम्मत,हो भरा ओज ही नस-नस में।
#आशा अमित नशीने 
  राजनांदगाँव
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

यातना गृह..!

Tue Jul 23 , 2019
  यह पुरानी हवेली उसके लिये यातना गृह से कम नहीं है..मानों किसी बड़े गुनाह के लिये आजीवन कारावास की  कठोर सजा मिली हो ..  ऐसा दंड कि ताउम्र इस बदरंग हवेली के चहारदीवारी के पीछे उस वृद्ध को सिसकते एवं घुटते हुये जीवन व्यतीत करना है..यहाँ से तो उसकी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।