१२ किताबों का विमोचन व हिंदी पर परिचर्चा होगी २९ को

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भोपाल।
हिन्दी पखवाड़े के अंतर्गत अन्तरा शब्दशक्ति प्रकाशन द्वारा मातृभाषा उन्नयन संस्थान के सौजन्य से प्रकाशित हिन्दी के विविध क्षेत्रों पर आधारित आठ पुस्तिकाओं एवं चार अन्य रचनाकारों की व्यक्तिगत कृतियों का विमोचन शनिवार २९ सितम्बर को सुबह 11 बजे नगर में हिन्दी भवन के महादेवी वर्मा कक्ष में होने जा रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक अहद प्रकाश जी होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं अक्षरा पत्रिका की संपादक सुनीता खत्री जी करेंगी। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ ग़ज़लकार अशोक मिज़ाज जी, सागर एवं वरिष्ठ व्यंग्यकार राजेन्द्र चौहान जी भोपाल होंगे।
आयोजन में मातृभाषा उन्नयन संस्थान के सौजन्य से निःशुल्क प्रकाशित पुस्तकें डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इंदौर (म.प्र.) द्वारा लिखित हिन्दी ‘आखिर क्यों’ और ‘हिन्दी ग्राम’ के साथ डॉ प्रीति सुराना, वारासिवनी (म.प्र.) की ‘विचार क्रांति’ और ‘गद्य लेखन का महत्व’ के अतिरिक्त ‘हिन्दी और तुष्टिकरण’ – शुभ्रा झा, दरभंगा (बिहार), ‘हिन्दी और सिनेमा’ – सीमा शिवहरे ‘सुमन’, भोपाल (म.प्र.), ‘हिंदी और गाँधीदर्शन’ – डॉ राजलक्ष्मी शिवहरे, जबलपुर (म.प्र.), ‘राष्ट्रभाषा और समाज’ – जयति जैन ‘नूतन, भोपाल (म.प्र.) रहेगी।
इसके अतिरिक्त रामचंद्र किल्लेदार ,ग्वालियर (म.प्र.) की ‘खुली आँखों के सपने’ , डॉ वासिफ काजी इंदौर (म.प्र.) की ‘अदीब’, डॉ. उपासना पाण्डेय भिवाड़ी (राज.) की ‘प्रेमानन्द राधेश्याम’ और डॉ. प्रीति सुराना की ही ‘काश!कभी सोचा होता,..’ पुस्तकें भी विमोचित होंगी।
हिन्दी के प्रचार प्रसार और के साथ संस्था हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु प्रतिबद्ध है व देशभर में हस्ताक्षर बदलो अभियान का संचालन कर रही है। उक्त जानकारी संस्थान के संवाद सेतु रोहित त्रिवेदी ने दी।
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।