ज़िंदगानी तुमसे है

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satindar
मोहब्ब्त तुमसे है शिकायत तुमसे है,
लासानी-सी ज़िंदगानी तुमसे है।
मेरे रब की इबादत तुमसे है,
मेरे घर की बरक़त तुमसे हैl
मेरी ज़िंदगी की उपमा तुमसे है,
मेरी ज़िंदगी का अलंकार तुमसे हैl
मेरी हिन्दी का छंद तुमसे है,
मेरी उर्दू का नुक्ता तुमसे हैl
तेरी मोहब्बत मेरे लम्हों की मात्रा,
मेरी ज़िंदगी का स्वर तुमसे हैl
तू जब से है सफर में मेरे,
मेरे सफर की वर्णमाला तुमसे हैl
मैं निकला हूँ सफर पे,
मेरी मंज़िल तुमसे हैl
समझूँ तुझे अपना किरदार,
मेरे किरदार की ख़ुशबू तुमसे हैl
गर मेरी ज़िंदगी में है खंड(शक्कर)कहीं,
उस खंड की मिठास तुमसे हैll
                                                                      #सतिंदर सिंह
परिचय : सतिंदर सिंह का जन्म २९ जुलाई १९८५ का है। एम.कॉम. की शिक्षा प्राप्त की है,और शिक्षक हैं। आप उत्तर प्रदेश के ललितपुर में रहते हैं। लिखना आपका शौक है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।