*हिंदी पटरानी बन गयी*

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ARCHANA KATARE
देखो हमारी हिंदी ,
पटरानी बन गयी
बँगला सिँधी फारसी अँग्रेजी
,उर्दू सब रानी बन गयी,
देखो हमारी हिन्दी
पटरानी बन रही,,,
ब से बिन्दी लगा कर
ह से हरवा पहन कर
च सेचूडी सजा कर
ल से लँहगा पहने
प से पायल छनका कर
म से मशहूर हो गयी
स से सिन्दूर  लाल लगा कर
सदा – सदा के लिये
सुहागिन बन गयी
त से तलवार ले
 क्ष से क्षत्राणी बन
 श से शक्तिशाली
हो गयी
मेरी हिन्दी पटरानी बन गयी,,,
ह से हवन कर
द से दुशमनोँ को
 र से राख कर रही
विदेशी भाषा से
सी से केट
डी से डाँग
जानवर न बन कर
म से माता
प से पिता बता रही
ल से लक्ष्मी
स से सरस्वति
 ज्ञ से ज्ञानी बना रही,
देखो हमारी हिन्दी
सब भषाओं को छोड
 पटरानी बन  गयी
अर्चना कटारे
      शहडोल( मध्यप्रदेश)
परिचय
 
नाम:अर्चना कटारे
माता:श्यामा देवी गुप्ता
पिता : स्व.वीरेन्द नाथ गुप्ता
पतिःश्री नीरज कटारे
जन्म स्थानःसिहोरा
शिक्षाः एम ,ऐ ,इतिहास
कार्य क्षेत्र ःशहडोल
सामाजिक क्षेत्रःसमाज की उन्नति के कविताओं के माध्यम सेलोगों मे चेतना जाग्रत  करना
विधाः काव्य लेखन भजन,कवितायेँ
गद्यः सँस्मरण,लघुकथा, कहानी,यात्रा वृत्तांत,।
लेखनके क्षेत्र मे प्रयत्नशील हूँ, पाराँगत नहीं हूँ।
 
प्रकाशन ः 
वनिता पत्रिका, सरिता मे कुछ कालम प्रकाशित।
 
ग्रह लक्ष्मी पत्रिका मे एक कालम प्रकाशित हुआ।
 
गहोई बन्धु पत्रिका मे लगातार कविता  प्रकाशित होतीं रहतीँ है जो कि मरे मनोबल को बढातीँ हैँ।
 
समाचारपत्र ः
 
 दैनिक भास्कर, समय, पत्रिका , समाचार पत्रों में कवितायें ,और लेख लघुकथा का आना ,मरे लिये नयी ऊर्जा भर देती है।
लोकजँग मे मेरी रचना को स्थान मिला ये मेरे लिये बहुत गौरव की बात है ।
 
हिन्दी शब्द शक्ति मे प्रकाशित कवितायेँ,सँस्मरण, लघुकथा आदि।
 
।गहोई महिला मँण्डल द्वारा ,प्रकाशित प्रयास पत्रिका में कहानी *इँसानियत का नतीजा* भी लिखी ,जिसकी सभी ने सराहना की ।
 
कभी कभी व्यँगयात्मक कविता लिख देती हुँ।
 
किसी घटना को देख कर मेरा मन भर आता और मे अपने को न रोकते हुए भी लिख देती हुँ।
 
सम्मानः बडे रूप मे तो नही मिला ।
 
लेखन का उद्देश्य ः समाज को दहेज मुक्त करवाना, बेटियां पूरी तरह सुरक्षित हो, पर्यावरण सुरक्षित रहे, ज्यादा तर कविता मेरी सँदेशात्मक रहती हैँ ।देश की प्रगति हो आदि।
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।