स्याणों    

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pavan anam

आज रोटी के लाले है

मगर दस दिन से एक पंडित

घर में डेरा डाले है!

हवन कि खुशबु से

घर, आंगन महक रहें हैं

मायुश चेहरों पर आशा के पंछी चहक रहें हैं

घर का चूल्हा राख से अट्टा पड़ा है

किन्तु अग्नि कुंड में दहकते ज्वाले है !

बुढा बाप  चारपाई पर पड़ा एक अद्द  पानी कि घूंट  को तरस

रहा है

काजू , किसमिस और  फलों के

ढेर

पंडित जी के हवाले है

वास्तु शास्त्र के हर हथकंडे

को अपनाया जा रहा है  !

भूखें पेटो को रोटी के लिए तडफाया जा रहा था

भोले भाले इंसानों के सर

पर मंडराते ये नाग काले है!

काफी दिनों से अविराम डोंग चल रहा है

समस्या का हल कहां मिल रहा है?

देव दूत , भुत प्रेत सब सो गये !

मगर मूर्खो कि दुनिया में

स्याणों के धंधे निराले हैं!

 

पवन ‘’अनाम’’     

राजस्थान कॉलेज ,पल्लू

 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।