सुरेश की लघुकथा पर फिल्म बनी

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       पिछले दिनों दिनॉक १३-०४-१९ को साहित्यकार सुरेश सौरभ की लघुकथा कबाड़ी पर आधारित लघुफिल्म फिल्म “कबाड़ी” का फिल्मांकन शिव सिंह सागर के निर्देशन में, फतेहपुर जिले में  किया गया। फिल्म का निर्माण जयंत  इंटरटेनमेन्ट फतेहपुर ने किया है। फिल्म में मालिक की भूमिका में- महेन्द्र सिंह यादव, कबाड़ी की भूमिका में-वसीक़ सनम, और मालकिन की भूमिका में अदाकारा- प्रतिभा पाण्डेय, के साथ नौकरानी की भूमिका में-बेबी साहू ने जोरदार अभिनय किया है। इस लघुफिल्म में एक कबाड़ी की उच्च मानसिकता के माध्यम से एक बड़ी सीख समाज के सामने रखी गई है, जिससे समाज का बौद्धिक तबका प्रेरित होगा। पटकथा- शिव सिंह सागर ने लिखी है। कैमरा मैन- अंकित सिंह  है। विदित रहे लखीमपुर निवासी सुरेश सौरभ की तमाम रचनाएं राष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हुई हैं।  जल्द ही यह फिल्म यूट्यूब चैनल पर आ रही है, जो लोगों को साहित्यिक प्रेरणा प्रदान करेगी।

निर्मल नगर लखीमपुर खीरी।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।