सुभाष-सा होना था…

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naman jain
मनहरण घनाक्षरी……
उस नेता को भुला के नेता सभी कहते हैं,
कैसे याद करुं उसे,हमें भी तो सोना था।
भारती करे विलाप, शहीदों की लाश पर,
मंत्रियों की लाश बिछे, उस पे क्या रोना था॥
सोई जनता के स्वाभिमान को जगाता गया,
देशभक्त एक-एक सुभाष-सा होना था।
युद्ध अपराधी जिसे कहा राजनीति ने भी,
उनको तो भारत का राष्ट्र पिता होना था॥
                                               #नमन जैन ‘अद्वितीय’
परिचय: नमन जैन ‘अद्वितीय’ की आयु १८ वर्ष है,और लेखन अवधि १० माह है।बी.काॅम. में अध्ययनरत नमन उत्तर प्रदेश के शामली स्थित खेडी करमू में रहते हैं। आपकी रुचि काव्य लेखन में है।
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नीलिमा

Wed Aug 23 , 2017
काली-काली घटाएँ, झूमकर यूँ लहरा गईं ज्यों तेरी नागिन-सी लहराती बलखाती जुल्फ औ’ अलक आसमां के दामन से, बूंदन का टपकना ज्यों काली कजरारी अँखियन से अँसूअन से मोती घन गर्जन बीच दामिनी चमके ज्यूं रक्तिम अधर बीच मोतियन की पांत॥                   […]

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।