सुंदर मोढी

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sidheshwari

गरीब मां बाप की सुंदर मोढी
अंधेरे में पल पल हुई बढ़ी
मांग मांग कर कापी किताब
चौथी कक्षा तक ही पढ़ी
जैसे जैसे बीता साल
बिटिया करती गई कमाल
काम काज कर हुई सयानी
रखती मां बाप का ख्याल
पापा करते मेहनत मजदूरी
पानी भरती मां बेचारी
घर घर काम वो करती
गरीबी की मार बढ़ी लाचारी
मां बाप की चिंता बढ़ी
पूनम की चांद की तरह बढ़ी
प्यार से उसको ब्याह रचाया
दुल्हन बन डोली चढी
आदमी निकला बड़ा निकम्मा
जूये ताश में हमेशा था रमा
घर में पढ गये खाने के लाले
जेवर बर्तन गिरवी रख डाले
साहुकार ने किया फरमान
पैसे दे ले जा सामान
गिरवी रख जा कोई चीज
रख अपने गृहस्थी का मान
किराए से सब कुछ मिलता है
कुछ साल आराम से जी सकती हैं
उसने अपने घर के खातिर
अपना कोख ही गिरवी रख डाली।
अपना कोख ही गिरवी रख डाली।

#सिद्धेश्वरी सराफ (शीलू)
     जबलपुर मध्य प्रदेश
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।