सात जन्मों का बंधन

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सात जन्मों का बंधन इतनी जल्दी भूल गई तू हाथ छुड़ाकर मेरा कितनी दूर निकल गई तू..!
हंसता, मुस्कुराता, खिलखिलाता मेरा आशियां उज़ड गया, तू गई पीछे तड़पाने तेरी याद रह गई,
कैसे खुद को संभालूँ अकेले जीना तूने कभी सीखाया ही नहीं
तुम क्या गई मेरे तन से रूह जुदा हो गई …!
सूना है घर,सिसकती है दीवारें,रसोई में बर्तन रोते है..!
बेड की सिलवटें
गमलों के पौधे
घूरती छत
झूमती हवा तुमको ही पुकारे..!
कोने पर पड़ा झाड़ू
तकिये का लिहाफ़
अलमारी में कपड़े
पंछियों की धुन तुम बिन बेसहारे..!
थी तुम तो सब में जान थी
आज बेजान है सारे नज़ारे
जाना आज मैंने गृहस्थी की नींव थी तू तेरे काँधे पर थमे थे घर के सारे अटारे
ज़िंदगी के हर सूर की तान थी तू
लय थी तू, तू रूठी तो हर सरगम टूटी..!
जब थी तू भाति थी हर शै
अब हर रंग फ़िके लगते है
छूटी गिरह तेरे हाथों की
हर रिश्ते बेसहारे लगते है
क्यूँ छोड़ गई रिश्ता तोड़ गई तू
बिन तेरे कैसे जीऊँ क्यूँ न बता गई तू..!
ले गई मुझमें से मुझको निकाल कर
क्यूँ सिर्फ़ जिस्म मेरा इधर छोड़ गई तू साँस लेने भर को ज़िंदा छोड़ गई तू
कहाँ ढूँढूं बता ना कौन से जहाँ में चली गई तू।।
भावना ठाकुर 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।