समय बड़ा बलवान

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bhagat

समय-समय का फेर है,समय बड़ा बलवान,
समय समझ करते रहो,दान मान सम्मान ;
यही है बात पते की।

समझ चूकी पछताय नर,समय बड़ा बलवान,
समय साथ जो जन चले,खिले होंठ मुस्कान..
सुधर जा अब तो प्राणी।

समय भूली छल-बल करे,करे अशुभ जो काम,
ऐसे ही नर कर रहे,मानवता बदनाम ;
रखो पहचान जरा-सी।

राजनीति पंकित हुई,सब-कुछ रहा बनाव,
स्वारथ हावी हैं यहाँ,पग-पग मिलते घाव;
सुधारो ढर्रा भैया।

बने भूप भी रंक है,रंक बने हैं भूप,
समय पलटता ही रहे,कभी छाँव तो धूप;
समय कीमत पहचानो।

समय विकट आया यहाँ,बाढ़ खेत को खाय,
रक्षक ही भक्षक बने,अब है कौन सहाय;
रोक लो यहीं हवा को।

देखो श्रम भूला मनुज,आज मशीनी लोग,
कल को औषधि जो रहा,आज समय वह रोग ;
नष्ट ही होगा यूँ सब।

लालच चढ़ा बुखार मन,कैसे उतरे आज,
एक शेष दिखता नहीं,रोग न जिसे समाज ;
कहो क्या होगा आगे।

संगम करता है सदा,समय जाँच- पड़ताल,
कभी डाँट-फटकार तो,करता कभी निहाल ;
सदा हो जय संगम की।

                                                                         #भगत ‘सहिष्णु’

परिचय : भगत टेलर ‘सहिष्णु’ प्रतापनगर (राजस्थान)में रहते हैं और प्रतियोगी शिक्षण कथा प्रवचन का व्यवसाय करते हैं। आप हर प्रकार के लेखन में सक्रिय हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।