श्री शारदा वाचनालय में मनाया गया विश्व पुस्तक दिवस

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गोंदिया।
नगर के प्रख्यात श्री शारदा वाचनालय में २३अप्रैल को विश्वपुस्तक दिवस प्रसिद्ध कवि गीतकार एवं वाचनालय के प्रमुख ग्रंथपाल श्री शिव शर्मा की अध्यक्षता में मनाया गया। इस प्रसंग पर नगर के उपस्थित कवि श्री छगन पंचे, श्री शशि तिवारी, श्री लक्ष्मीकांत कटरे एवं श्री निखिलेशसिंह यादव ने पुष्पगुच्छ प्रदान कर श्री शिव शर्मा को वाचनालय एवं साहित्य की दीर्घ सेवा के लिए सम्मानित किया एवं विश्वपुस्तक दिवस की शुभकामनाएँ दी।
वरिष्ठ कवि शशि तिवारी ने अपना व श्रीमती कमलेश तिवारी का काव्य संग्रह ‘कलरव’, छगन पंचे ने ‘फुरसत के क्षण’ एवं ‘मंथन’, लक्ष्मीकांत कटरे ने चिकोटी व्यंग्य काव्य संग्रह वाचनालय एवं श्री शिव शर्मा को भेंट कर इस दिन को सार्थक बनाया।
श्री शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि लेखन की सार्थकता तब ही है कि वह श्रोता और पाठक के मन को छू जाए। कविता सिर्फ़ तालियों और वाहवाही की मोहताज नहीं होती। कविता में रस उत्पन्न होना चाहिए, जिसमें श्रोता इतना मग्न हो जाए कि उसे ताली बजाने का भी ध्यान न रहे।
इस अवसर पर एक कवि गोष्ठी भी हुई, जिसमें निखिलेशसिंह यादव, लक्ष्मीकांत कटरे, छगन पंचे ‘छगन’, शशि तिवारी एवं शिव शर्मा ने गीत, ग़ज़ल, व्यंग्य, घनाक्षरी छंद सुनाए।
आभार निखिलेशसिंह यादव ने माना।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।