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arpan jain

सूचना और संचार क्रांति के दौर में आज प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के बीच वेब पत्रकारिता का चलन तेजी से बढ़ा है और अपनी पहचान बना ली है.अखबारों की तरह बेव पत्र और पत्रिकाओं का जाल, अंतरजाल पर पूरी तरह बिछ चुका है. छोटे-बड़े हर शहर से अमूमन बेव पत्रकारिता संचालित हो रही है. छोटे-बड़े सभी शहरों के प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया भी वेब पर हैं. इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में थोड़े ही समय में इसने बड़ा मुकाम पा लिया है. हालांकि समर अभी शेष है और भविष्य उज्जवल.

क्या होती है वेब पत्रकारिता

जिस प्रकार अखबारों, पत्रिकाओं में खबरों के चयन, संपादन या लेखन होते हैं. यही कार्य यदि इंटरनेट पर किया जाता है तो वेब पत्रकारिता कहलाता है.

खुबियाँ

वेब पत्रकारिता एक ऐसा माध्यम जो अपने अंदर प्रिंट, टीवी और रेडियो को समेटे है. मीडिया का लोकतंत्रीकरण करने में वेब पत्रकारिता बड़ी भूमिका निभा रहा है. संचार माध्यम के रूप में इस प्लेटफार्म ने हर आदमी का आवाज बुलंद कर हजारों-करोड़ो लोगो तक पहुंचाया है. पहले जहां इंटरनेट कम्प्यूटर तक सीमित था, वहीं नई तकनीकों से लैस मोबाइलों, स्मार्ट फोन और टैब में भी इंटरनेट का चलन बढ़ता जा रहा. किसी भी जगह कहीं भी इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा सकता है. यह वेब पत्रकारिता का ही कमाल है कि आप दुनिया के किसी भी कोने में बैठकर किसी भी भाषा में, किसी भी दिन और किसी भी देश का अखबार या खबरें पढ़ सकते हैं. यह ख़बरों का तीब्र माध्यम के रूप में भी स्वीकारा गया है.

चुनौती और समस्या

पहली बड़ी चुनौती कम्प्यूटर साक्षारता दर की है. दूसरी चुनौती भारत में अभी भी वेब पत्रकारिता की पहुंच अगली पंक्ति में खड़े लोगों तक ही सीमित है. इधर के दिनों में यह मध्यम वर्ग तक भी आया है. जहां तक अंतिम कतार में खड़े लोगों तक पहुंचने की बात है तो अभी यह कोसों दूर है. हालांकि अंतरजाल मुहैया कराने वाली कंपनियों ने मोबाइल फोन और ग्रामीण क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दिया है और इंटरनेट अब गांवों तक पहुंच गया है. तीसरी चुनौती पत्रकारों के समक्ष तकनीकी ज्ञान की है. अन्य चुनौती के रूप में वेब पत्रकारिता में सबसे बड़ा सवाल विश्वसनीयता को लेकर भी है. आज लोगों को इतनी जगहों से समाचार मिल रहे हैं कि लोगों के लिए समाचारों की विश्वसनीयता एक बड़ा मुद्दा है. यह वेब पत्रकारिता के लिए भी एक बड़ी चुनौती है.

भविष्य

आज वेब-संस्करण चलाने बाली समाचार-पत्र और पत्रिकाओं की संख्या कम है. भविष्य में हर पत्र-पत्रिका ऑन-लाईन होगी. साथ ही साथ स्वतंत्र न्यूज पोर्टल की संख्या में भी वृद्धि होगी. पत्रिका ‘न्यूज वीक’ ने अपने प्रिंट संस्करण को बंद कर ऑनलाईन संस्करण जारी रखने का फैसला किया है. ‘जनसत्ता’के बारे में यह आसार लगाया जा रहा है कि समाचार-पत्र घाटे से बचने के लिए प्रिंट संस्करण बंद कर ऑन-लाईन से अपनी सेवा जारी रखेगा. बात स्पष्ट है कि जिस पत्र का लक्षित समूह उच्च वर्ग है और जिनके पास इंटरनेट आसानी से उपलब्ध है, वह धीरे-धीरे प्रिंट संस्करण बंद कर पूर्ण रूप से ऑन-लाईन हो जायेगा.

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक 2011 तक भारत में 12.5 करोड़ लोग इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे थें जिसकी संख्या में तीव्र वृद्धि होगी.

वेब पत्रकारिता का उज्जवल भविष्य इस बात से भी आंका जा सकता है कि भारत में मोबाइल तकनीक और फोन सेवा प्रदान करने बाले बड़े टेलिकॉम ऑपरेटरों ने 3G सेवाओं के लाइसेंस के लिए हाल ही में करीब 16 अरब डॉलर यानी 75,600 करोड़ रुपए की बोली लगाई.

पहुंच

वेब पत्रकारिता की पहुंच एक निश्चित भौगोलिक सीमा तक नही है अपितु इसकी पहुंच वैश्विक है. वेब पत्रकारिता करने वालों का दायरा बहुत बड़ा हो जाता है. उनकी ख़बर एक पल में सारी दुनिया में पहुँच जाती है जो कि अन्य समाचार माध्यमों में संभव नहीं है|

वेब पत्रकारिता को पेशा बनाने बालो के लिए ध्यान रखने योग्य बातें

*हिंदी इनस्क्रिप्ट की बोर्ड की जानकारी हो |

*यूनिकोड फाँट तकनीकि पर काम करें |

*वेब पत्रकारिता के समाचार सूचनापरक होना चाहिए, वाक्य छोटे होने चाहिए|

*सर्च इंजन का की-वर्ड समाचार में कम से कम दो-तीन बार जरूर लायें |

*कुछ की-वर्ड समाचार के हेड-लाईन में भी जरूर लायें|

*समय का ख्याल रखें- आज, कल और परसो से बचें |

*संस्था का नाम भी समाचार में जरूर लायें|

*Active-Voice में ख़बरों को लिखें|

*तीसरे या चौथे पेराग्राफ के बाद समाचार का बैक-ग्राउंड दें |

*तस्वीरें और ग्राफिक से पेज को सजायें |

*संदर्भ और स्रोत का भरपूर उपयोग करें |

                                                                               #अर्पण जैन ‘अविचल’
अर्पण जैन ‘अविचल’ खबर हलचल न्यूज के संपादक है और पत्रकार होने के साथ साथ , शायर और स्तंभकार भी हैं| भारतीय पत्रकारीता पर शोध कर रहे हैं जैन ने ‘आंचलिक पत्रकारों पर एक पुस्तक भी लिखी हैं | अविचल ने अपने कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा हैं और आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता के आधार आंचलिक पत्रकारिता को ज़्यादा लिखा हैं | मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बड़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया | बेचलर आफ इंजीनियरिंग (कंप्यूटर साइंस) से करने के बाद एमबीए और एम जे की डिग्री हासिल की | कई पत्रकार संगठनों के राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं | भारत का पहला पत्रकारों के लिए बनाया गया सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपेडीया www.IndianReporters.com” भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है|मोबाइल नं : +91-9893877455
ईमेल :arpan455@gmail.com

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