वेदना की प्रीत

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शब्द से मैं वेदना की प्रीत लिखना चाहता हूँ,

काव्य की संवेदना से रीत लिखना चाहता हूँ।

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पथ न विचलित हो सृजन की वादियों में इसलिए,

लेखनी से चेतना का गीत लिखना चाहता हूँ।

 

धर्म यह कवि का नहीं,चारण बने युगदेव का,

कर्म का पथ छोड़कर,तारण बने स्वमेव का।

 

लोकहित के भाव में संगीत लिखना चाहता हूँ,

लेखनी से चेतना का गीत लिखना चाहता हूँ।

 

भाव से भूषित गगन में मन विहंगों-सा उड़े,

काव्य के सारे चरण की सार में शुचिता गढ़े।

 

हर व्यथा का शौर्य से मैं मीत लिखना चाहता हूँ,

लेखनी से चेतना का गीत लिखना चाहता हूँ।

 

यश तुम्हें देगी तुम्हारी लेखनी की धार बस,

स्वार्थ की लिप्सा गढ़ी तो जा फंसे मझधार बस।

 

इसलिए कविता से युग की, जीत लिखना चाहता हूँ,

लेखनी से चेतना का गीत लिखना चाहता हूँ।

———– #अनुपम आलोक

#अनुपम कुमार सिंह ‘अनुपम आलोक’

परिचय : साहित्य सृजन व पत्रकारिता में बेहद रुचि रखने वाले अनुपम कुमार सिंह यानि ‘अनुपम आलोक’ इस धरती पर १९६१ में आए हैं। जनपद उन्नाव (उ.प्र.)के मो0 चौधराना निवासी श्री सिंह ने रेफ्रीजेशन टेक्नालाजी में डिप्लोमा की शिक्षा ली है।

 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।