विरह बसंत का

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kumud shreevastav
सखी ! रहा कहां कब वह बसंत
मधुमास का प्यारा वो बसंत
बढ़े जंगल कंकरीट के अब
खो गया उन्हीं में यह बसंत
जब पीली सरसों के खेतों में
 हम सखियाँ दौड़ लगाते थे
चने ,मटर की मीठी बाली को
घुसकर खेतों में सब खाते थे
सखी कहां ..
सखी कहां गया प्यारा बसंत
पेड़ों पर आती थी जब बौराई
लगती थी दुपहरी अलसाई
उठती थी दिल में हूक अनंत
सखी कहां रहाअब …
गन्ने के रस मीठी केरी संग
अपनीं शाम यूं ढ़लती थी
 धानी चुनरीओढ़े धरती माँ
दुल्हन के रूप में सजती थी
सखी कहां रहा …
जब कोयल गीत सुनाती थी
पनघट पर धूप खिलाती थी
प्यारा लगता था वो बसंत
सखी रहा कहां अब वो बसंत
सब गांव शहर में रहे बदल
नष्ट हुये पक्षी ,बाग जंगल
अब गमलों में ही आता बसंत
बस मन ललचाता ही बसंत
सखी कहां रहा अब वो  बसंत…
#कुमुद श्रीवास्तव वर्मा.
परिचय- 
नाम _कुमुद श्रीवास्तव वर्मा
साहित्यिक उपनाम — गद्य गोविंदे ( अध्यक्ष ,साहित्य संगम संस्थानद्वारा प्रदत्त)
वर्तमान पता-लखनऊ(उत्तर प्रदेश)
विधा — गद्य ,पद्य ,(संस्मरण, लेख ,  कहानीं ,लघु कथा ,कवितायें 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।