वास्तविक मुद्दों को गुमराह कर “आरोप-प्रत्यारोप” की राजनीति

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shivankit tiwari
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहाँ सभी वर्गों,जातियों एवं सम्प्रदायों से जुड़े लोगो को अपनी बात कहने और अपना पक्ष रखने की स्पष्ट रूप से स्वतंत्रता है।
लेकिन,अगर हम भारत देश की वर्तमान राजनीति की बात करते है तो दिलो-दिमाग में बहुत ही नकरात्मक छवि सामने आती है क्योंकि आज की राजनीति का स्तर दिनोंदिन नीचे गिरता जा रहा है और वर्तमान राजनीतक छवि पूर्णतया दूषित होती जा रही है।
राजनीति के इस गिरते हुये स्तर के कारण जनमानस की वास्तविक एवं मूलभूत आवश्यकतायें और प्रमुख मद्दे गायब होते जा रहे हैं।
राजनीति के ठेकेदारों के द्वारा जनता को सिर्फ वायदों का लालच देकर ठगा जाता है और इस तरह उनके साथ सिर्फ और सिर्फ छलावा ही किया जाता है।
राजनेता एक-दूसरे पर व्यक्तिगत रूप से टिप्पणियाँ कर
सिर्फ जनता को गुमराह करते है। समाज पर किन मुद्दों पर वास्तविक रूप से बहस एवं चर्चा होनी चाहिये इससे उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। उन्हें तो बस अपना उल्लू सीधा करने से मतलब है उन्हें न ही जनता के मुद्दों पर प्रकाश डालने से मतलब है और न ही जनमानस की समस्याओं का यथाउचित निवारण करने से।
चुनावी रण के समय जब अपनी बातों को जनता के समक्ष रखते है तो वादों का पिटारा उतावलेपन में ऐसे खोलते है जैसे बस जीतने के बाद बड़ी तेजी से किये हुये वादों पर शीघ्रतापूर्वक अमल करेगे और जो सारे मुद्दों का जिक्र किया है उन मुद्दों को भी विशेष रूप से पूरा करेगे लेकिन चुनाव जीतते ही उनके रंग एवं ढंग दोनों में अद्भुत परिवर्तन आ जाता है,मुद्दों की बात तो दूर है वो तो सुनने और पहचानने से भी साफ इंकार कर देते है पाँच साल तक के लिये।
अब राजनीति का मकसद सेवाभाव न होकर जातिगत भेदभाव व व्यक्तिगत दोषारोपण पर निर्भर होता जा रहा है। भारत जैसे बड़े लोकतान्त्रिक देश में जनता ही सर्वोपरि है पर वर्तमान समय में गौर करे तो परिणाम बिल्कुल इसके विपरीत ही प्राप्त हो रहे है। लोकतंत्र की
वास्तविक मजबूती के लिये आवश्यक कदम यह है कि जनता को मतदान के साथ-साथ चुनें गये प्रतिनिधि से पाँच साल का हिसाब लेना जरूरी है ताकि राजनीति
में हो रही गिरावट और भ्रष्टाचार में कुछ हद तक सुधार लाया जा सके क्योंकि राजनीति का गिरता हुआ स्तर समाज और देश के लिये चिंता का मुख्य विषय है।
राजनीति मे व्यक्तिगत रूप से टिप्पणी का कोई स्थान नही होना चाहिये लेकिन राजनेता विकास और मुद्दों पर चर्चा करते कम दिखते है मगर पक्ष और विपक्ष पर जमकर व्यक्तिगत आलोचना और टिप्पणियों भरा प्रहार करते है जबकि राजनेताओं  को किसी पर व्यक्तिगत प्रहार करते समय वाणी और भाषा के दूषित प्रयोग से बचना चाहिए।
 राजनेताओं को पक्ष-विपक्ष पर व्यक्तिगत टिप्पणी रूपी बहस को छोड़कर असली बहस जनता के विकास के मुद्दों पर करनी चाहिये और मजबूती के साथ जनमानस की सारी समस्याओं का समाधान बड़ी तल्लीनता और ईमानदारी के साथ करना चाहिये।
 लोकतंत्र में सभी की हिस्सेदारी से ही देश को विकसित बनाया जा सकता है जनता का काम केवल मतदान करना नही होता बल्कि अपने अधिकारों के लिये आवाज उठाना और जरुरती मुद्दों पर विकास के लिये जागरूक हो अपने कार्यों की पूर्ति कराना है तब जाकर राजनेताओं को आपके अधिकारों और ताकत का वास्तविक अंदाजा हो पायेगा और भारत देश मजबूती के साथ विकास पथ पर प्रशस्त हो सकेगा।
#शिवांकित तिवारी ‘शिवा’
परिचयशिवांकित तिवारी का उपनाम ‘शिवा’ है। जन्म तारीख १ जनवरी १९९९ और जन्म स्थान-ग्राम-बिधुई खुर्द (जिला-सतना,म.प्र.)है। वर्तमान में जबलपुर (मध्यप्रदेश)में बसेरा है। मध्यप्रदेश के श्री तिवारी ने कक्षा १२वीं प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है,और जबलपुर से आयुर्वेद चिकित्सक की पढ़ाई जारी है। विद्यार्थी के रुप में कार्यरत होकर सामाजिक गतिविधि के निमित्त कुछ मित्रों के साथ संस्था शुरू की है,जो गरीब बच्चों की पढ़ाई,प्रबंधन,असहायों को रोजगार के अवसर,गरीब बहनों के विवाह में सहयोग, बुजुर्गों को आश्रय स्थान एवं रखरखाव की जिम्मेदारी आदि कार्य में सक्रिय हैं। आपकी लेखन विधा मूलतः काव्य तथा लेख है,जबकि ग़ज़ल लेखन पर प्रयासरत हैं। भाषा ज्ञान हिन्दी का है,और यही इनका सर्वस्व है। प्रकाशन के अंतर्गत किताब का कार्य जारी है। शौकिया लेखक होकर हिन्दी से प्यार निभाने वाले शिवा की रचनाओं को कई क्षेत्रीय पत्र-पत्रिकाओं तथा ऑनलाइन पत्रिकाओं में भी स्थान मिला है। इनको प्राप्त सम्मान में-‘हिन्दी का भक्त’ सर्वोच्च सम्मान एवं ‘हिन्दुस्तान महान है’ प्रथम सम्मान प्रमुख है। यह ब्लॉग पर भी लिखते हैं। इनकी विशेष उपलब्धि-भारत भूमि में पैदा होकर माँ हिन्दी का आश्रय पाना ही है। शिवांकित तिवारी की लेखनी का उद्देश्य-बस हिन्दी को वैश्विक स्तर पर सर्वश्रेष्ठता की श्रेणी में पहला स्थान दिलाना एवं माँ हिन्दी को ही आराध्यता के साथ व्यक्त कराना है। इनके लिए प्रेरणा पुंज-माँ हिन्दी,माँ शारदे,और बड़े भाई पं. अभिलाष तिवारी है। इनकी विशेषज्ञता-प्रेरणास्पद वक्ता,युवा कवि,सूत्रधार और हास्य अभिनय में है। बात की जाए रुचि की तो,कविता,लेख,पत्र-पत्रिकाएँ पढ़ना, प्रेरणादायी व्याख्यान देना,कवि सम्मेलन में शामिल करना,और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति पर ध्यान देना है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।