वंदे गौ मातरम

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shreeman
कोटि-कोटि  कंठों से कह दो,वंदे गौ मातरम नारे,
गौरक्षा के हित में आओ,कान्हा बन के तुम प्यारेl  
 
सनातनी  संस्कार कहाँ  है,तोड़ने लगे अब नाता, 
बिलख रही है आहें भर के,गली-गली में गौ माताl   
 
वारिस के ही सामने गैया,बूचड़खानों में झूल रही, 
एक ओर माता कहते ही,अब क्यों सरकार भूल रहीl  
 
आर्द्रनाद  हुंकार समाकर,धर शस्त्रों को अब सारे,
कोटि-कोटि कंठों  से  कह  दो,वंदे गौ मातरम नारेl 
 
कामधेनु बन के थी,घर-घर लक्ष्मी का अवतार लिए,
जन-जन पापों को हरती थी,आँगन में भवसार लिएl 
 
हम हिन्दू की मनोभावना,जनमानस का मंत्र बना, 
गौरक्षा के हित में तब से,शासन  का  यह तंत्र बनाl 
 
काट रहे  हैं गौ मैया को,उसके  नैनों  के तारे,
कोटि-कोटि  कंठों  से कह दो,वंदे  गौ मातरम नारेl 
विकट हो रहा कलियुग भीतर,माता का सम्मान नहीं,
गौरक्षा  करता  था  भगवन,वो  वंशी मधुगान नहींl 
 
नीच  धरातल राजनीति ने,हनन किया संस्कारों को,
फिर भी धरती धरती है यह,सहनशील ममकारों कोl  
 
रुद्र  उठो  नंदी  के  हित  में,शिव  तांडव  बन संहारे,
कोटि-कोटि  कंठों  से  कह दो,वंदे  गौ मातर  नारेl 
                                                           #श्रीमन्नारायण चारी’विराट
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।