राहुल व्यास: ग्रामीण परिवेश से काव्य मंचों के गौरव तक

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रश्मिरथी

राहुल व्यास:  ग्रामीण परिवेश से काव्य मंचों के गौरव तक

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 डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’

मौत अटल है….

आ तू, ऐसे क्यों खड़ी है,
जिया हूं ज़िन्दगी तो मौत भी एक घड़ी है ।
शाश्वत है सब कुछ तो भी अंजाम जटिल है,
इंतजार सबकुछ नहीं होता, मौत अटल है ।
अब तो सारी दुनिया को एक ही बात कहेंगे ।
अटल थे, अटल है, अटल रहेंगे ।

राहुल व्यास का जन्म 17 दिसंबर 1993 को मध्यप्रदेश के धार जिले में हुआ था । राहुल व्यास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा राजगढ़ नगर के रत्न राज शिशु मंदिर से प्राप्त की । उनके पिता श्री प्रह्लाद व्यास, म.प्र. वेयर हॉउस में चतुर्थ श्रेणी के पद पर कार्यरत है । उनकी माता श्रीमती चेतना व्यास गृहिणी हैं। बालक उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय से बारहवीं में उनके उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर (अभियंता) बनाना चाहते थे। परन्तु राहुल व्यास का दिमाग इन पढाई से हटकर था । साहित्य के क्षेत्र में आगे बढ़ने के ख्याल से उन्होंने स्नातक किया ।

राहुल व्यास ने अपना करियर मध्यप्रदेश में व्याख्याता के रूप में 2013 मे शुरू किया। तत्पश्चात वो अब तक महाविद्यालयों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही राहुल व्यास हिन्दी कविता मंच के सबसे व्यस्ततम कवियों में से हैं। उन्होंने अब तक सेकड़ो कवि-सम्मेलनों में कविता पाठ किया है। साथ ही वह कई पत्रिकाओं में नियमित रूप से लिखते हैं एवं करियर मार्गदर्शन एवं प्रेरक मार्गदर्शक के रूप में कई बड़े-बड़े संस्थानों में अपने व्याख्यान प्रदान करते है। अपनी चित्रकारी की प्रतिभा (अक्षर गणेश) द्वारा भी वे कला के क्षेत्र में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान देते है|वर्तमान में वे दूरदर्शन महानिदेशालय दिल्ली में पदस्थ है|साथ ही वी आर फाउंडेशन एवं आरम्भ-आशा की किरण (गैर लाभकारी संसथान) स्वयं चलाते है | विज्ञानं की ओर रूचि होने के कारण लगभग 30 बच्चो को बाल वैज्ञानिक की उपाधि से सम्मुख कराया |

विभिन्न पत्रिकाओं में नियमित रूप से छपने के अलावा राहुल व्यास की दो साझा संग्रा पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- ‘साहित्य सागर ‘ और ‘सत्यम प्रभात ‘ एवं तीन पुस्तके प्रकाशित होना बची है | मार्गदर्शी होने के कारण हर जगह सम्मान की प्राप्ति दी गई |

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रस – श्रृंगार एवं वीर रस 
अनुभव – लगभग 8 वर्ष से अधिक 
निवास- इंदौर (मध्यप्रदेश )

संपर्क- 09977500466

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।