ये जग का पालनहार है

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sunil vishw
अमीर गिन रहा नोट यहाँ,
हाथ मले किसान।
वीआईपी सोए मखमल पे,
किसान बांधे खेत मचान।।

रात को जागत दिन को भागत,
खेतन करे किलोल।
खून पसीना बहा दिया,
आखिर नहीं मिले उचित मोल।।

सपने लाख सजा लिए,
ले फसल गए बजरिया की ओर।
दाम मिला कम मिला,
फिर भी किया संतोष।।

राशन के, दवाई के पैसे
दिए चुकाए।
घर पहुँचे जब तलक,
बिजली बाले आँगन आए।।

बचा-कुचा सब दे दिया,
हाथ नहीं रहा इक लाल।
कहत किशन बा-सुन भाई मालिक,
अब तो बस अगले बरस की आस।।

दूसरे बरस भगवान ने,
फसल दी बिगाड़।
खून के आंसू रो रहा अब,
देखो जग का पालनहार।।

बैठे भूख से बिलख जाते, ये देख किसान आधे मर जाते।
बाकी कमी नेता जी पूरी कर गए,
जब 200 रु. बीघा हाथ में धर गए।।

बंद करो ठिठोली किसान से,
ये जग का पालनहार है।
कुछ सहयोग दो इसे,
इसकी मेहनत अपरम्पार है।।

#सुनील विश्वकर्मा

परिचय : सुनील विश्वकर्मा मध्यप्रदेश के छोटे गांव महुआखेड़ा (जिला गुना) के निवासी हैं। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा अपने गांव एवं बाद की इंदौर से (स्नातकोत्तर)प्राप्त की है। आप लिखने का शौक रखते हैं।वर्तमान में इंदौर में प्राइवेट नौकरी में कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।