मेरा समर्पित प्रेम

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rahul prajapat
तुम सब जानती हो,में कैसा हूँ, कँहा हूँ,
अधरों में छुपी बातों को भी तुम जानती हो कि मैं कैसा हूँ, कँहा हूँ।।
मेरे बिना कहे समझ भी लेती हो,पढ़ लेती हो,
यही तो है तेरा प्यार मेरे लिए कि बिना कहे सब कुछ समझ लेती हो,
जो जोड़े रखता हैं तुम्हे मुझसे और मुझे तुमसे।।
जैसे चाँद हैं बेरौनक बिन चाँदनी के,
बस उसी तरह जुड़ी हो तुम भी मुझसे,और मैं तुमसे।।
ये “देव” भी तो बेरौनक से हो जाता है अपने सुर,लय, राग के बिना।
यही तो प्रेम है ना,यही तो समर्पण है मेरा
तुम्हारे लिए……
#प्रजापति राहुल”देव”

परिचय : 
पूरा नाम: प्रजापति राहुल “देव”
जन्मस्थान- मुजफ्फरनगर (उ.प्र)
पिता- श्री रणधीर सिंह
माता- श्रीमती दयावती
शिक्षा- एम बी ए (मार्केटिंग)
कार्य क्षेत्र- दैनिक जागरण 
रुचि-
गायन,लेखन,अध्यात्म ज्ञान
स्थायी पता-हरिद्वार, उत्तराखंड
उप्लब्धियाँ: 
1.अध्यात्म ज्ञान एवं उनसे जुड़े सामाजिक कार्यों में परस्पर योगदान
2. समाज सेवा 
3.लेखन कार्य
4. मंच संचालन
5. पत्रिकाओं में प्रकाशित लेख
6.पत्रिका “देवालय’ का संपूर्ण कार्य 
7. विभिन्न संस्थाओं द्वारा प्रशशस्ति पत्र 
8.काव्य संग्रह “काव्य गंगा”
9. अग्रिम संग्रह- “मेरे सुर,लय, गीत”
कार्यक्षेत्र:
दैनिक जागरण प्रिंट मीडिया 

 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।