माना कि हालात बेकाबू हो गए कई बार

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rupesh jain

माना कि हालात बेकाबू हो गए कई बार

जब भी वक़्त नासाज हुआ

हर बार भरोसा रखा मैंने 

या ख़ुदा तेरे भरोसे को क्या हुआ

कभी लगता है सँभल गया

कभी यों ही बिगड़ गया

वक़्त ऐसा 

जैसे रेत का बुत मुठ्ठी से फिसल गया

रोकना तो चाहा हमेशा पर

लम्हा इतना अजीब है

क्यों न समझ सका वो तड़प दिल की 

साथ रहकर भी

छोड़कर तुम जहां से गए थे 

मैं आज भी वहीँ खड़ा हूँ

यूँ तुम तो सम्हल गए होंगे

मैं आज भी बिखरा पड़ा हूँ

इस दिल में रहोगे ता-उम्र

फिर क्यूँ डरते हो

पाक है मोहब्बत मेरी

यूँ नजरे चुरा के ना निकलो

इंतिज़ार है तेरे इक इशारे का

आगे खूबसूरत जहाँ पड़ा है

तेरे बिना वर्ना

दर्द का दरिया ‘राहत’ आँखों से बहता है

 

#डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’

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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।