माँ 

Read Time0Seconds
mala rajesh ary
माँ तुमसा कोई नही,, ना जाने कितनी रात तुम मेरे खातिर सोई नही,,
अवगुण मेरे सिर्फ तुमको ही नही दिखते,, तुम्हारे सिवाय मेरा कोई ठोर नही।।
मै भुखा होऊंगा शायद,, ये सोचकर ही भुख लगने पर भी खाती एक कौर नही,,
टिका दरवाजे पर कान आहट मेरी पाने को,, इंतजार मे तुम मेरे जब तक ना आ जांऊ,, सोती नही..
देर रात को पूछती,, चल खाना लगा दुं,, मै खाकर आया हुँ कहते ही मेरे,,
अपनी थाली परोसती माँ,, बिना गिले शिकवे के हर एक कोर को सुकुन से निगलती माँ,,
आज इस संसार की कठोरता से,, टुटकर छटपटाता हुँ मै,, थकहार जाता हुँ मै,,
वहीं सुकुन,, वही प्यार,, वही आंचल की छांव के लिये तड़प जाता हुँ मै,,
बिना शर्त,, बिना प्रलोभन तुम लाड़ लड़ाती थी,, कभी ना तुम हमारे रिश्तों को पैसे से तोलती थी,,
अब तो यहाँ हर रिश्ता बिकता है,, रुपयों की ताकत से ही टिकता है।।
फरमाईशो की फेहरिस्त है,, अब ना कोई करता तुमसा मेरा इंतजार है,,
अब कहाँ मेरे जीवन मे तुमसा,, लाड़ दुलार है…
आते ही एक गिलास पानी को भी तरस जाता हुँ,, गिले शिकवे से हो बेजार,,
माँ अब मै भुखा ही सो जाता हुँ।।
तुमको फिर मै माँ,, बहुत बहुत याद करता हुँ,,
जिस दिन तुम सपने मे आ दुलार जाती हो,, मेरी जिंदगी के रूखेपन को,, अपने आंचल से भिगो जाती हो…
माँ तुम याद बहुत आती हो।
#माला राजेश आर्य
खण्डवा(मध्यप्रदेश) 
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

न याद कर

Sun May 26 , 2019
न याद कर तू दर्द भरे वो बीते हुए पल, वो समय असफलता का वह हारे हुए पल । वो  धोखे जो  किए तेरे संग इस दुनिया ने , वो छलावा जो किया तेरे संग तेरे अपनों ने। वो दर्द का समंदर जो उठा था जिंदगी में , वह यादें […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।