महिष्मति प्रकाशन के स्थापना को 50 वर्ष पूर्ण*

Read Time7Seconds

vijay joshi

निमाड़ की साहित्यिक धरोहर को संजोए रखने एवं उसका संवर्धन करने के लिए निर्माण की धरा पर साठ के दशक में माहिष्मती प्रकाशन की स्थापना को साकार करने वाले श्री बाबूलाल सेन की 11 वीं पुण्यतिथि पर उस महान साहित्य मनीषी को कोटि कोटि नमन करता हूँ।  अध्यात्म की इस पावन धरा महेश्वर में पिता श्री चुन्नीलाल सेन और माता गोपी बाई सेन की बगिया में 23 सितंबर 1924 को एक पुत्र रत्न  रूपी पुष्प खिला (जन्म) हुआ। जो निमाड़ के साहित्य आकाश में बाबूलाल सेन के नाम से प्रख्यात हुआ।

विषम परिस्थितियों में जब आजादी की लड़ाई से देश जूझ रहा था। चहुओर क्रान्ति, दहशत का माहौल था। निमाड़ में रेवा तट के किनारे अपनी विलक्षण प्रतिभा के धनी बाबूलाल सेन शिक्षा जगत से अपने जीवन की शुरुआत करते हुए साहित्य की अविरल धारा को अंतःकरण में निरंतर प्रवाहित कर रहे थे।  60 के दशक में श्री बाबूलाल सेन ने साहित्य संकलन का शुभारंभ माहिष्मती प्रकाशन के माध्यम से किया। वर्ष दर वर्ष सेन साहब की कलम माहिष्मती प्रकाशन को पुष्पित और पल्लवित करती रही। और दर्जनों साहित्य कृति का प्रकाशन निरंतर जारी रहा। साथ ही 60-70 के दशक में नईदुनिया के महेश्वर से संपादक/पत्रकार की भूमिका निभाई। एक शासकीय सेवा के साथ साथ निभिकता से पत्रकारिता का साहसिक काम किया। विषम परिस्थितियों, आर्थिक संकट में भी साहित्य सेवा को सर्वोपरि रखते हुवे बाबूलाल एक आदर्श व्यक्तित्व के साथ कृतित्व साहित्य की स्थापना माहिष्मति प्रकाशन, शारदा निवास महेश्वर की। 1969 में की। जिसकी गवाही आज उनके निवास पर लगा बोर्ड दे रहा है।
निमाड़ और महेश्वर के इतिहास और पुरातत्व के संदर्भ में 1975 में “माहिष्मती-स्मारिका” का नामक पुस्तक का प्रकाशन व विमोचन माहिष्मति प्रकाशन से  हुआ। जिसने क्षेत्र की छवि को साहित्यिक, सामाजिक, राजनीतिक, ऐतिहासिक पटल पर उभारने के लिए सफल रहा। जिसने देश प्रदेश में महेश्वर की पहचान स्थापित करवाई, तो साथ में बाबूलाल सेन एक साहित्य के ध्रुव सितारे के रूप में उभरकर साहित्य जगत में देदीप्यमान हुए।

     ‘’जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’’ मंत्र को जिसने अपने जेहन में रखकर साहित्य की साधना की ऐसे बाबूलाल सेन मां रेवा और निमाड़ क्षेत्र के अवदान को कैसे भूल सकते थे। जन्मभूमि, व कर्मभूमि को  समर्पित करते हुए माहिष्मती प्रकाशन के माध्यम से आपने “ निमाड़ी गीत गंगा’’ नामक लोक भाषा काव्य का संकलन का प्रकाशन किया। तो वहीं “हर-हर रेवा मैया “ निमाड़ी काव्य संग्रह के साथ नर्मदा महेश्वर के इतिहास का पर्यटकों को सही-सही दर्शन बोध हो इस हेतु ‘’महेश्वर दर्शन पर्यटन’’   गाइड पुस्तिका के निरंतर तीन संस्करण का प्रकाशन किया। महेश्वर इसके लिए बाबूलाल सेन का सदैव ऋणी रहेगा और युगों युगों तक महेश्वर उनके इस अवदन को याद करेगा।

   श्री बाबूलाल सेन की छवि कवि ही नहीं एक लेखक के रूप में भी उभरकर आई जब उनकी कृतियों में महिष्मति प्रकाशन के माध्यम से “ मुर्गे का ब्याह” नामक लोककथा तथा ‘नर्मदा के संत कवि”  नामक शोध ग्रंथ प्रकाशित हुआ। साथ ही “ निमाड़ी संस्कारों की दुनिया’’ नामक लोक साहित्य ग्रंथ भी उन्होंने माहिष्मती प्रकाशन के माध्यम से पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया। बाबूलाल सेन ऐसे कवि लेखक थे, जो राग द्वेष और ईर्ष्या से काफी ऊपर उठकर जीवन जीने वाले व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपने समकालीन और अनुज लेखकों के व्यक्तित्व तथा साहित्यिक परिचय को ऊंचाइयां देने के लिए निमाड़ी संतो को साहित्य आकाश में तारामंडल की तरह स्थापित करने के लिए “निमाड़ी के कलमकार कलाकार’’  का प्रकाशन अपनी उम्र के 80 साल के पड़ाव पर 2003 में पूर्ण किया। साथ ही निमाड़ी संत अफजल साहब की कृति का भावानुवाद भी “अमर- सागर” नाम से श्री बाबूलाल सेन ने करके संत अफजल साहब को अपना साहित्य सुमन समर्पित किया। प्रदेश स्तर तक संस्थाओं के रूप में अपनी संबद्धता स्थापित कर निमाड़ी लोक साहित्य परिषद में इतिहास संकलन समिति में महती भूमिका निभाई। तो वहीं पद्मश्री श्री राम नारायण उपाध्याय दादा के साथ सचिव के रूप में लोक संस्कृति न्यास खंडवा की निरंतर सेवा की है। प्रदेश स्तरीय पाठक मंच एवं मध्य प्रदेश लेखक संघ महेश्वर इकाई की स्थापना करके क्षेत्र को एक साहित्यिक माहौल की सौगात भी आपके द्वारा प्रदान की गई जो आज भी निरंतर जारी है जिसे वर्तमान में गीत गजल कार हरीश दुबे एवं विजय जोशी निरंतर संचालित कर रहे हैं। आपको विद्या वाचस्पति की मानक उपाधि से साहित्य संस्कृति कला अकादमी प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश तथा जैमिनी कला अकादमी हरियाणा ने आचार्य की मानद उपाधि से सम्मानित किया विगत 50 वर्षों के साहित्य का अध्ययन मनन लेखन चिंतन देने वाले श्री बाबूलाल सेन के सम्मानों की एक लंबी फेहरिस्त है, जिसे सम्मानित करके वह सम्मान अपने आप में गौरवान्वित हुए।

जिसमें निमाड़ लोक संस्कृति न्यास खंडवा द्वारा ‘गणगौर सम्मान’ “अक्षर आदित्य सम्मान” मध्य प्रदेश लेखक संघ भोपाल द्वारा दिया गया।।  “श्रेष्ठ कला आचार्य सम्मान” मधुबन भोपाल से मिला तो सरस्वती साहित्य वाटिका गोरखपुर ने “सरस्वती साहित्य सम्मान” से भी नवाजा।

देश भर के सम्मानों की श्रेणी में राजस्थान से “गीता देवी सम्मान” मथुरा से “मैथिलीशरण गुप्त सम्मान” कोलकाता से “मनीषिका सम्मान’ तो मध्यप्रदेश के बड़वानी से “संत अफजल सम्मान” के साथ ही अनेक सम्मान आपके साहित्य आंगन में उपस्थित हुए।  आकाशवाणी केंद्र इंदौर भोपाल से निरंतर आपकी काव्य वाणी मुखरित होती रही। महिष्मति प्रकाशन के ऐसे मूर्धन्य संपादक श्री बाबूलाल सेन को उनकी 11 वीं पुण्यतिथि पर नमन करते हुए आज महेश्वर का साहित्य समाज बहुत गौरवान्वित है। म प्र लेखक संध के अध्यक्ष हरीश दुबे , चन्दकान्त सेन को श्री बाबूलाल जी अपनी साहित्य विरासत सौपी  उनकी स्मृतियों को याद कर अश्रु नमित भी है। अखिल निमाड़ लोक परिषद महेश्वर, तथा लघुकथा शोध केंद्र महेश्वर आपकी अमूल्य कृतियों को धरोहर के रूप में संजोये हुवे है।

लेकिन जैसा कि हर दौर में लेखक कवि छला गया है। उनके आवासन  के बाद कतिपय चेहरे अपनी छवि को निखारने के लिए माहिष्मती प्रकाशन के इतने लंबे नाम और काम   को नवीन कलेवर चढ़ाकर अपने नाम से पेटेंट कराना चाहते हैं। और माहिष्मति प्रकाशन के साथ भी ऐसी ही घटनाओं की संभावनाएं परिलक्षित होती नजर आ रही है लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि माहिष्मति प्रकाशन के हजारों पाठक आज भी देश प्रदेश में विद्यमान है जो बाबूलाल सेन के महिष्मति प्रकाशन के पाठक हैं और जिनका स्नेह आज भी बाबूलाल सेन के साहित्य और परिवार पर निरंतर बना हुआ है।  वहां साहित्य के विशाल वटवृक्ष रूपी माहिष्मती प्रकाशन को किसी तूफान से कोई खतरा नहीं हो सकता है। क्योंकि महिष्मति प्रकाशन की जड़े साहित्य भूमि की बहुत गहराइयों तक जमी हुई है। आज 26 जून को यह साहित्य सूरज आकाश में विलीन हो गया। और ‘अक्षर-अमर” के रूप में साहित्य को हमे सौप गया है।नमुझे याद है कि “निमाड़ी साहित्य के कलमकार कलाकार” नामक ग्रन्थ की भूमिका में डॉ शरद पगारे ने बाबूलाल सेन साहब के बारे में लिखा था कि “ निमाड़ की साहित्यिक सांस्कृतिक चेतना के मुखर स्वरों को रेखांकित एवं प्रकाशित करने में माहिष्मती प्रकाशन महेश्वर का ऐतिहासिक अवदान है, इसके पूर्व महिष्मति प्रकाशन ने अनेक पुस्तकें निर्माण पर निमाड़ मालवा ही नहीं देश भर के लोक साहित्य के अध्ययन प्रेमियों को प्रदान की है।”

अंत में श्री बाबूलाल जी सेन द्वारा रचित कुछ निमाड़ी दोहे से उनकी स्मृतियों को पाठको के लिए ताजा  करता करते हुवे अश्रुपूरित नमन करता हूँ।

असा विधाता ना लिख्या “छठी रात” म लेख।।

नादान दोस्त घणा मिल्या नई दानों दुश्मन एक।।1।।

दानो दुश्मन मिलS  तो पुत्र पुरबलो जाण।

ओ की दुश्मनी को करो घणो मान-सम्मान।2।

स्मृति आलेख-

26 जून पर विशेष

*11 वीं पुण्यतिथि  पर नईदुनिया के पत्रकार व साहित्य मनीषी के कृतित्व व व्यक्तिव को नमन*

#विजय जोशी ‘शीतांशु’
जीवन परिचय

विजय जोशी ‘शीतांशु’
पिता:-  श्री मनमोहन जोशी
माता:- ब्रह्मलीन श्रीमती जयंती जोशी
पत्नी:- सीमा जोशी / बेटी- निहारिका /बेटा- शशांक
शिक्षा:- एम.ए. हिन्दी साहित्य, एम.ए. अंग्रेजी साहित्य
विधा:- लघुकथा लेखन
संग्रह:- आशा के दीप (प्रथम लघुकथा संग्रह )2015 
           ठहराव में सुख कहाँ(द्वितीय लघुकथा संग्रह)2018
संप्रति:- अध्यापक 
संस्थाएं- सचिव मध्य प्रदेश लेखक संघ  भोपाल,इकाई महेश्वर 
सचिव, राज्य अध्यापक संघ , वि ख महेश्वर
संचालक अनिलोप महेश्वर, खरगोन , 
सचिव, ना.ब्रा. समाज महेश्वर

काव्य पाठ व प्रकाशन 
निमाड़ उत्सव महेश्वर जनपदीय कविता पाठ 2014/ संकलन ‘लघुकथा साहित्य कलश’ संपादक पटियाला पंजाब में रचना सहभागीता/लघुकथा साहित्यकार कोश में परिचय प्रकाशन/, दिशा प्रकाशन दिल्ली से परिचय स्थान प्राप्त/ यशधारा भोज प्रकाशन धार के वार्षिक अंको में नियमित रचना प्रकाशन स्थान/   लघुकथा संकलन ‘सीप में समुद्र’/ लघुकथा टाइम्स में आंचलिक लोक भाषा पर स्तम्भ में नियमित लेखन सहयोगी संपादक के रूप में/ नार्मदीय लोक,नार्मदीय जगत में रचना लघुकथा प्रकाशन/
प्रतिष्ठित दैनिक अखबारों में- माधुरिमा परिशिष्ठ दैनिक भास्कर/ नायिका परिशिष्ठ नईदुनिया/दृष्टि गुड़गांव   विशेषांक में लघुकथा।

सम्मान 
जे एम डी पब्लिकेशन दिल्ली से जे एम डी सम्मान पत्र 2015 
महेश्वर से तहसील स्तरीय श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान 2016
हमज़मी संस्था  राजपुर जिला बड़वानी ” से  ‘कवि काव्य सम्मान 2016’
जिलाधीश खरगोन द्वारा ‘जिला स्तरीय उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान 2017’
म.प्र. लेखक संघ भोपाल द्वारा प्रदेशस्तरीय ‘देवकी नंदन माहेश्वरी सम्मान 2017’  / संग्रह ‘आशा के दीप’ पर
लघुकथा लहरी सम्मान 2016/ वनिका पब्लिकेशन दिल्ली/ लघुकथा पुरस्कार पर
म प्र स्थापना दिवस काव्य सम्मान 2017/कलेक्टर जिला प्रशासन खरगोन/काव्य पाठ पर
क्षितिज अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन में सहभागिता सम्मान 2018
क्षितिज संस्था इंदौर से  अखिल भारतीय लघुकथा सहभागिता सम्मान 2018.

डाक का पता/पोस्टल एड्रेस
विजय जोशी ‘शीतांशु’
हिंगलाज मंदिर के पास
सहस्त्रार्जुन मार्ग महेश्वर 
तहसील महेश्वर जिला

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

क्रोध

Fri Jun 28 , 2019
स्वयं का दुश्मन क्रोध है दुसरो का दुश्मन भी क्रोध जो इसके आगोश में आता उसका विवेक लोप हो जाता पहली हानि स्वयं को करता दूसरी, जिसपर करते क्रोध क्रोध बड़ा विकार कहलाता इसे पाकर कोई लाभ न पाता प्रकृति के विरुद्ध है क्रोध शांति का दुश्मन है क्रोध शांत […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।