ममता की निर्मलधारा

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naveeta johari
माँ से बच्चे का रिश्ता रूहानी होता है
कैसे आँचल में खिलखिलाता है
प्यार की थपकी पहचान लेता है
लोरी सुन चैन से सो जाता है
   पहली गुरू बन माँ सिखाती है
    उसे जीवन का ककहरा
    बताती है क्या है खोटा
    और क्या है खरा
ममता की निर्मलधारा से सींचती है
नन्ही आँखों में उगते सपनों को
देती है विश्वास की नींव जिस पर
खड़ी हों सफलता की मीनारें
    अन्नपूर्णा बन देती है
    स्वास्थ्य का  उपहार
   तो कभी सखा बन देती है
    व्यक्तित्व को निखार
कभी प्रतिदान की अपेक्षा भी नहीं रखती
दुआओं प्रार्थनाओं में मंगलकामनाएं रहतीं
जो  बचातीं हर मुश्किल से कवच बनकर
माँ ईश्वर का वरदान है इस धरती पर
            # नविता जौहरी
              भोपाल ( म. प्र.)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।