मन की व्यथा

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vipin kumar morya

सुबह सुबह तुम श्रंगार सजा कर,
कोमल फूलों को क्यों चुनती हो।
शुर्ख गुलाबी साड़ी में तुम युवती,
फूलों से ज्यादा कोमल लगती हो।

सँभल सँभल कर तुम चुनना ,
इन नन्हे नन्हे कोमल फूलों को।
पौधा भी जलता तुमसे सोना,
ध्यान तुम्हें है रखना आहत न हो।

एक बात जरा तुम बतलाओ,
इतनी उत्सुकता क्यों तुम में ।
या प्रेमी की कथा कहो युवती,
जो हो सारी व्यथा कहो युवती।

क्या तुम्हें बताऊँ प्यारे पथिक,
सालों साल बाद आज उनकी,
अगवानी है अपने देश पथिक,
फूलों से राह सजाऊँगी उनकी।

बस प्रेम कथा का सार है अपना,
बरसों से मैं तरस रही हूँ पथिक,
आज अचानक प्रेम आया अपना,
बस इसी उत्सुकता में हूँ पथिक।

आज का मौसम और भी प्यारा,
बादल की घनघोर घटाएँ छाई,
शायद यह लाई सन्देश काली घटा ,
फिर लौट आया अपने देश पिया।

   #विपिन कुमार मौर्या

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।