मन की चाह

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preeti goud
मैं धरती का दीप बनूंगा,
दूर करूँगा अँधियारा।
साक्षरता रूपी लहर चलाकर,
शिक्षित करूँगा जग सारा।
मैं धरती का पुष्प बनूंगा,
पावन सुगंध फैलाऊगा।
काँटे सारे स्वयं लेकर मैं,
कोमल छाँव बिछाऊँगा।
मैं धरती का खग बनूँगा,
सदभावना फैलाऊँगा।
समृद्धि गरिमा प्रतीक बनकर,
झंडा ऊँचा उठाऊँगा।
मैं धरती का कृषक बनूँगा,
पैदावार बढ़ाऊँगा।
आगे बढ़कर उन्नति में,
कदम से कदम मिलाऊँगा।
मैं धरती का रक्षक बनकर,
हिमालय कहलाऊँगा।
ऊँची-ऊँची श्रृंग फैलाकर ,
देश का गौरव बढ़ाऊँगा।
भारतीय कहलाऊंगा।
#नाम-प्रीति गौड़
पता- जयपुर(राजस्थान)
शिक्षा- एम टेक ( कंप्यूटर साइंस)
ए ऍम आई ई टी ई- ( टेलिकॉम्युनिकेशन इंजीनियरिंग)
पॉलिटेक्निक डिप्लोमा- (इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन)
डीसीए, डोएक ऐ लेवल कोर्स
रूचि- कविताएं लिखना, पुस्तकें पढ़ना
उपलब्धता-कविता वाचन में द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।